जके रूप सौं साह बंध्यौ सुजाँनं।
जथा चंद्र की कांति चक्कोर माँनं॥
जथा पंकजं वै दुरैफैं लुभाए।
तथा साह बंध्यौ सनेहं सुभाए॥