भयौ भयानक तिमिर बन हरम सबै पतसाह को इक्क समय पातसाह बन जलक्रीड़ा हम करत सब करि बिचार त्रिय कृत कृया महिमा उतरे बाजि तैं पुच्छिय महिमा साहि तब ससि मुख बृंद स्वछंद मिलि सुंदरता सुकुमार निधि