इस खेल में रेत की ऊंची चौकी बनाकर उस पर एक खिलाड़ी बैठ जाता है। उसके बाद एक अन्य खिलाड़ी उसकी कमर पीछे से पकड़कर उल्टा सो जाता है। तीसरा खिलाड़ी उसके पैर पकड़कर उल्टा सो जाता है। इसी तरह सभी खिलाड़ी अपने से पीछे वाले खिलाड़ी के पैर क्रमवार पकड़कर उल्टे सो जाते हैं। इसके बाद एक खिलाड़ी उन सभी के चारों तरफ घूमकर रेत के ढेर पर बैठे खिलाड़ी के पास जाकर कहता है – 

‘सरण-बरण री कांकरी, सरणाटा करती आय, राजाजी रै बाग में कांई जिनावर जाय ?’ (यह सनसनाहट कैसी है ? राजा के बाग में से कौन गुजर रहा है ?)

तब आगे बैठा हुआ लड़का कहता है – ‘कुण हुसी ?’ (कौन होगा ?)

उसे जवाब मिलता है – ‘भीम कोटवाल।’

वह पूछता है – ‘वो क्या चाहता है ?’

‘ककड़ी-मतीरा।’

बैठा हुआ लड़का कहता है – ‘कच्चे हैं।’

घूमने वाला लड़का कहता है – ‘पके हुए लूंगा।’

इसके बाद वह सोते हुए लड़कों के सिर पर अंगुली को मोड़कर चोट मारते हुए मतीरे की भांति बजाता है और पीछे वाले लड़के को पका हुआ मतीरा कहकर खींचता है। इस प्रकार यह रोचक खेल चलता रहता है

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