‘लूणिया घाटी’ समतल भूमि पर रेत से एक खास आकार बनाकर खेला जाता है। एक बड़े गोल घेरे के भीतर छोटा घेरा बनाया जाता है। छोटे घेरे में चार कोने बनाए जाते हैं। खेल शुरू करने से पहले सभी खिलाड़ी चोर का चयन करते हैं। इसके बाद चोर बना हुआ खिलाड़ी छोटे घेरे में धूल के ढेर के पास खड़ा हो जाता है। दूसरे खिलाड़ी घेरे में दौड़ते हुए इस ढेर से नमक (धूल) लेना चाहते हैं पर चोर उनको ऐसा करने से रोकने की कोशिश करता है।
कोई खिलाड़ी धूल के ढेर से मुट्ठी भरकर वहां बने खास निशान यमुना पर से कूद जाता है तो वह विजयी होता है। यदि वह ऐसा करने में विफल रहता है तो मरा हुआ मान लिया जाता है। इस प्रक्रिया में जितने भी खिलाड़ी मरते हैं, उन सभी को खेल के अंत में चोर सहित अन्य खिलाड़ियों को बधाई देनी पड़ती है। इसके बाद मृत हुए खिलाड़ी विजेता खिलाड़ियों को अपनी पीठ पर लादकर घेरे में घुमाते हैं। इसके बाद खेल नए सिरे से खेल शुरू किया जाता है।