खो-खो पुराना भारतीय खेल है जिसकी उत्पत्ति महाराष्ट्र से मानी जाती है। मराठी भाषा में इसे पहले के समय ‘राथेरा’ कहा जाता था। खो-खो एक तेज गति वाला खेल है जिसमें खिलाड़ियों की फुर्ती और बुद्धिमत्ता की परख होती है। यह खेल दौड़ने और चपलता पर आधारित है। इस खेल में दो पक्ष होते हैं जिसमें प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं। इनमें से 9 खिलाड़ी मैदान पर खेलते हैं और 3 खिलाड़ी अतिरिक्त होते हैं। खो-खो में सात-सात मिनट की दो पारियां होती हैं जिसमें एक पारी का समय पीछा करने और दूसरी पारी का समय बचाव करने के लिए निर्धारित होता है। पीछा करने वाली टीम के आठ खिलाड़ी बीच की रेखा पर विपरीत दिशा में मुंह करके बैठते हैं और नौवां खिलाड़ी सामने की तरफ से प्रतिपक्षी का पीछा करता है। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में यह खेल विशेष रूप से लोकप्रिय है।
खो - खो का मैदान और आयाम
खो- खो का मैदान आयताकार होता है, जिसका माप 27 मी. X 16 मी. होता है। मैदान में दो 27 मी. की रेखाएं साइड लाइन्स कहलाती हैं जबकि 16 मी. की दो रेखा एंड लाइन्स कहलाती हैं। दो एंड लाइन्स के समानांतर 1.5 मी. की दूरी पर क्षेत्र के दोनों सिरों पर दो छोटे आयताकार क्षेत्रों का सीमांकन करने के लिए दो रेखाएं खींची जाती हैं, जो फ्री जोन कहलाती हैं। दो फ्री जोन के भीतरी किनारे के बीच में दो पोल (120-125 सेमी लंबाई और 9-10 सेमी व्यास) जमीन पर लंबवत लगाए जाते हैं। एक छोटी गली जिसकी चौड़ाई 30 से.मी. होती है, साइड लाइन्स के समानांतर दो पोल के निचले हिस्से को जोड़ती है और ये केंद्रीय लेन कहलाती है। दो मुक्त क्षेत्रों के बीच के क्षेत्र को फिर आठ और लेन से विभाजित किया जाता है, जिन्हें क्रॉस लेन कहा जाता है। इन्हें एक दूसरे से समान दूरी और एंड लाइन्स के समानांतर खींचा जाता है। क्रॉस लेन 35 सेमी. चौड़ी होती हैं।
खो खो के नियम
खो-खो मैच की शुरुआत सिक्का उछालने से होती है। विजेता कप्तान अपने हाथों को ऊपर रखता है और अपनी तर्जनी को या तो केंद्रीय रेखा की ओर इशारा करता है, जिसका मतलब चेज करना होता है। जबकि साइड लाइन का इशारा करके बचाव करने का संकेत देता है। चेज करने वाली टीम जिसमें नौ खिलाड़ी शामिल होते हैं, चेज करने के लिए मैदान में उतरती है। टीम के आठ खिलाड़ी बैठ जाते हैं। चेज करने वाले लगातार एक ही दिशा में नहीं जा सकते और उसे साइड लाइन्स के विपरीत पोजीशन लेना होता है। नौवें चेजर को अटैकर या एक्टिव चेजर कहते हैं, जो मैच का आगाज फ्री जोन से करता है।
बचाव (डिफेंडिंग) टीम मैच की शुरुआत में ग्रुप में तीन डिफेंडर भेजती है। एक्टिव चेजर को इन तीनों डिफेंडर में से किसी एक को छूना होता है। चेज के दौरान चेजर का मूवमेंट भी निश्चित होता है। चेजर जिस दिशा में पहला स्टेप बढ़ाता है, उसे उसी दिशा में दौड़ लगाना होता है। डिफेंडर को चेज करने के दौरान सेंट्रल लेन को क्रॉस नहीं करना होता है। यदि चेजर अपनी दिशा को बदलना चाहता है या सेंट्रल लाइन के हाफ को क्रॉस करने के लिए पहले फ्री जोन में जाना होता है तो वह पोल को टच करने के बाद दिशा बदलकर गेम को और दिलचस्प बनाना जारी रख सकता है।
हालांकि वह अपने साथी गैर एक्टिव चेजर को खो-खो बोलते हुए छूते हुए उसे चेज की जिम्मेदारी दे सकता है। जैसे ही चेजर अपने साथी को खो बोलता है कि वह चेजर एक्टिव हो जाता है जबकि एक्टिव चेजर शिथिल हो जाता है और खो बोलकर उसकी जगह बैठ जाता है। सामान्य रूप से खो तब दिया जाता है, जब डिफेंडर सेंट्रल लेन के आखिरी छोर को क्रॉस कर जाता है। इसलिए किसी भी चेजर को टैगिंग का तब सामना करना पड़ता है, जब चेजर कोर्ट की दिशा में होता है। टैग या खो कंधे और कमर के बीच में ही सामान्य रूप से मानी जाती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह अमान्य होता है। जब चेजर द्वारा डिफेंडर को छू लिया जाता है, तब चेजिंग टीम अंक जीतने में सफल होती है। डिफेंडिंग टीम के जब तीन डिफेंडर आउट हो जाते हैं, तब उन्हें तीन डिफेंडर फौरन से खेल में शामिल करने होते हैं। एक टर्न के दौरान तीन डिफेंडर के हर ग्रुप को क्रमवार बनाए रखना होता है। आखिरी बचे डिफेंडर बैच को टैग करने वाला अटैकर चेज जारी नहीं रख सकता है। इसलिए उन्हें अपने साथियों को खो या टैग करना होता है, ताकि नए बैच का डिफेंडर खेल में शामिल हो सके।
परंपरागत रूप से टीमें अपने सर्वश्रेष्ठ तीन डिफेंडर को सबसे पहले बैच में डिफेंस में उतारती है। नौ मिनट के बाद चेज करने वाली टीम डिफेंड करने वाली टीम बन जाती है और पारी का दूसरा भाग खेला जाता है। यही क्रम अन्य पारी में भी दोहराया जाता है और सबसे अधिक अंक वाली टीम जीत जाती है। हालांकि चेज करने वाली टीम का कप्तान अपनी पहली पारी को समय से पहले समाप्त कर सकता है। दूसरी पारी में कप्तान कभी भी टर्न खत्म कर सकता है। साथ ही क्रिकेट की तरह ही इसमें भी फॉलोऑन होता है। खो-खो में पहले चेज करने वाली टीम के पास पहली पारी में छह या आठ अंक से अधिक की बढ़त होने पर अपने विपक्षी टीम पर 'फॉलोऑन' लागू करने का विकल्प होता है। यदि एक फॉलोऑन लागू किया जाता है तो पिछड़ने वाली टीम दूसरी पारी में पहले चेज करती है और जिस टीम ने फॉलोऑन को लागू किया है, वह अपने चेज करने की बारी ले सकती है।
फुटबॉल की तरह खो-खो में भी पीला और लाल कार्ड दिया जाता है। यदि खिलाड़ी का व्यवहार अच्छा न हो या अत्यधिक आक्रामक तरीका अपनाता हो या कोई अन्य तकनीकी गड़बड़ी करता है तो उसे ये कार्ड दिए जाते हैं। पीला कार्ड पहली चेतावनी है और एक मैच में दो पीले कार्ड का मतलब है कि खिलाड़ी को शेष मैच और किसी विशेष टूर्नामेंट के अगले मैच से बाहर बैठना होगा। सीधा लाल कार्ड पाने वाले खिलाड़ी को जारी मैच और टूर्नामेंट के अगले मैच से निलंबित कर दिया जाता है।