कैर एक मध्यम या छोटे आकार का झाड़ीनुमा पौधा है। इसे संस्कृत में करील कहा जाता है। कैर का वैज्ञानिक नाम कैपेरिस डेसिडुआ (Capparis decidua) है। यह झाड़ीनुमा आकृति में उगता है। इसकी सामान्य ऊंचाई 2 से 3 मीटर होती है पर कुछ पौधे 5 मीटर तक भी वृक्षनुमा आकार में तक भी बढ़ जाते हैं। कैर का पौधा दक्षिण और मध्य एशिया,तक बढ़ते हैं। कैर मध्य-दक्षिण एशिया, अफ्रीका और थार के मरुस्थल में मुख्य रूप से पाया जाता है।
राजस्थान के मरुस्थलीय भू-भाग में प्राय: ताल वाली भूमि पर कैर के पौधे पाए जाते हैं। यह टेढ़ी-मेढ़ी चिकनी शाखाओं वाला पौधा होता है जिस पर पत्तियां नहीं होती। कैर की शाखाओं पर तीखे कांटे होते हैं। इसमें वर्ष में दो बार मार्च–अप्रेल और सितंबर-अक्टूबर में लाल- नारंगी रंग के फूल लगते हैं जो महीने भर में फल में बदल जाते हैं। इन्हें राजस्थानी भाषा में केरिया कहा जाता है। इसके कच्चे फलों को सांगरी के साथ मिलाकर सब्जी बनाई जाती है जो राजस्थान में बेहद लोकप्रिय है। कैर के पके फलों का रंग गुलाबी होता है जिन्हें स्थानीय भाषा में ढालु कहा जाता है। ये खाने में काफी स्वादिष्ट होते हैं। इन्हीं फलों में कैर के बीज होते हैं।
कैर का उपयोग
कैर के हरे फ़लों को खास विधि से उपचारित करने के बाद सब्जी और आचार बनाने में काम में लिया जाता है। इसके छोटे फलों से बेहद स्वादिष्ट सब्जी बनती है। कैर का अचार भी बड़ा स्वाद होता है। कैर के हरे फ़ल को सुखाकर उनका उपयोग कढ़ी बनाने में किया जाता है। इन सूखे फलों के चूर्ण को नमक के साथ खाने से पेट दर्द में तत्काल आराम मिलता है।
इस पौधे का पारिस्थितिकी संतुलन में अपना अमूल्य योगदान रहा है। कैर जैव विविधता का संरक्षक होता है। कैर के पौधों के नीचे कई छोटे-बड़े जीव-जंतुओं जैसे गिलहरी, खरगोश, लोमड़ी, हिरण, तीतर, मोर, सर्प, चूहे आदि के आवास स्थल भी होते हैं।
कैर-सांगरी की सब्जी और अचार बनाने से पहले फलों को उपचारित करने की विधि
कैर के हरे फल को सब्जी बनाने के लिए पहले उपचारित करना पड़ता है क्योंकि यह कसैले स्वाद का होता है। कैर के हरे फल (केरिये) अप्रेल के पहले सप्ताह में आते हैं जो लगभग 20 दिन तक मिलते रहते हैं। इन्हें सब्जी और अचार में काम में लेने से पहले हरे कैर को मिट्टी के पुराने मटके में पानी में भिगोया जाता है। इसमें पानी के साथ छाछ और नमक भी डाला जाता है। लगभग 3 दिनों में कैर उपचारित हो जाते हैं। सब्जी और आचार बनाने से पहले इन्हें सादे पानी में तीन-चार दिन में पुन: भिगोया जाता है। इन उपचारित कैरों से सब्जी या छाछ के साथ कढ़ी बनाई जाती है। उपचारित कैर को सुखाकर छोटे-छोटे पैकेटों में लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
कैर-सांगरी की सब्जी
कैर-सांगरी राजस्थान की लोकप्रिय सब्जी है। इस सब्जी में कैर के साथ सांगरी की फलियों को काम में लिया जाता है। सांगरी खेजड़ी के पेड़ पर लगने वाली कच्ची फलियों को कहा जाता है। कैर-सांगरी की सब्जी में काफी मसाले और तेल डाला जाता है। कैर की सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ मधुमेह रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। कैर की सब्जी को शुद्ध ऑर्गेनिक कहा जा सकता है। इसके अलावा यह अनेक औषधीय गुणों से परिपूर्ण होती है।
कैर वानिकी को संकट
बढ़ती आबादी और मानवीय गतिविधियों के कारण राजस्थान में कैर-वानिकी को संकट पैदा होता जा रहा है। मरुस्थल के अनेक इलाकों में नहर और ट्यूबवेल से सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से साल में दो फसलें ली जाने लगी हैं। इससे जमीन में नमी बढ़ रही है और केर की जड़ें गलने लगी हैं। कैर के पौधे समूह में होते हैं पर आजकल खेती की अधिकता के कारण इतनी खाली जमीन नहीं रह गई है। इसके कारण भी कैरों की संख्या कम होती जा रही है। यह स्थिति मरुस्थलीय-वानिकी के लिए बेहद घातक है। कैर जैसे मरुस्थलीय पौधों का संरक्षण करना बेहद आवश्यक है। इसे संरक्षित करके ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। कैर के फल काफी मंहगी दरों पर बिकते हैं जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में काफी सुधार लाया जा सकता है।