म्हैं बात जाणूं हूं के म्हारै बेटै नै बात समझावणी पड़सी के सगळा मिनख न्याव माथै चालै कोनी अर सगळा मिनख साचा पण होवै कोनी। पण आप उणनै बात समझाईजौ के जिण भांत समाज में लुच्चा लफंगा होवै। जिण भांत चालाक अर घोर स्वार्थी राजनेता होवै, जिण भांत चोखा अर भला मिनख होवै— उणी’ज भांत चालाक अर घोर स्वार्थी राजनेता होवै... अर उणी’ज भांत भावनाशीळ अर कर्तव्यनिष्ठ कार्यकर्ता लाध जावै। उणनै आप बात सिखाईजौ जे संसार में दुसमी होवै तो दोस्त पण लाधै। म्हैं जाणूं के उणनै बात सिखावतां थोड़ौ वखत तो लागसी पण आप उणनै बात जरूर समझाईजौ के मैणत रै पाण कमायोड़ौ अेक रूपियौ, मुफत में आयौड़ा पांच रूपियां करतां घणौ कीमती होवै। उणनै खेल भावना सूं हारणौ सिखाईजौ अर जीतवा रौ आणंद पण सिखाईजौ। उणनै अबार सूं इज शिक्षा दिराईजौ के समाज में गुंडां नै हरावणा कोई अबखौ काम कोनी। जे आपसूं बण आवै तो उणनै पोथियां री अजीब दुनिया सूं ओळखाण कराईजौ। उणनै थोड़ौ निरांत सूं बैठण रौ वखत दिराईजौ, जिणसूं वो शांति सूं अेकलौ बैठ’र आभै में ऊंचा उडता पंखेरुवां, सूरज रै प्रकाश में गणगणाट करती मधमाखियां अर नीलीछग्ग टेकरियां माथै उग्यौड़ा अनोखा फूलां रौ शाश्वत रहस्य शोधवा रौ आणंद उठाय सकै।

शाळा में उणनै बात जरूर सिखाईजौ के परीक्षा में चोरी सूं नकल करनै पास होवण करतां नापास होवणौ घणौ मान भरियौ है। दूजा सगळा बात कैवै के उणरा विचार खोटा है, छतांपण वो बात धार लेवै के उणरा विचार सही है। उणनै आप भला मिनखां सागै नरमाई सूं बरताव करणौ अर खोटा मिनखां सागै करड़ाई सूं पेश आवणौ सिखाईजौ। म्हारै बेटा रै मन में आप इसी हिम्मत भराईजौ के जिण वखत सगळा पवन प्रमाणै पीठ बदळता होवै, तो वो टोळा भेळौ शिळवा रै बदळै छाती ठोर नै अेकलौ ऊभौ होय जावै अर अेकल वीर बण सकै। इणमें इसी आदत पाड़जौ के वो सगळां री बात नै गुणै अर सत्य री छालणी में छाण नै जिकौ सही होवै उणनै इज ग्रहण करै।

जे आपसूं बण आवै तो उणनै दुख में हंसणौ सिखाईजौ अर बात समझाय दीजौ के आंसूड़ा ढळकावण में कोई शरम री बात कोनी। पण दुष्टां सूं अळगौ अर खुशामद खोरां सूं सावचेत रैवण री शिक्षा दिराईजौ। आपरी बुद्धि अर अर शक्ति रौ वो वत्ता सूं वत्तौ उपयोग करै— बात आप उणनै समझाईजौ, पण खुद री आत्मा अर हिरदै नै कदैई पईसां साटै नीं बेचै।

गळत बहुमत रा हाका आगळ वो झुकै नी अर अडिग ऊभौ रैयनै गळत बात रौ छाती ठोक नै सामनौ करै, इसी शिक्षा आप उणनै देता रहीजौ। आप उणनै अे सगळी बातां हेत अर प्रेम सागै सिखाईजौ। पण अणूंतौ लाड राखनै बिगाड़जौ मत। कारण के आग में तपियां पछै इज लोखंड फौळाद बणै। वो हर प्रकार सूं शक्तिवान बणै, इसौ उपाव कराईजौ। उणनै खुद माथै पूरौ भरोसौ अर विश्वास रैवै, इसी सीख उणनै दिराईजौ। कारण के इणसूं उणरै मन में मानवता रै प्रति विश्वास पैदा होसी।

म्हैं जाणूं हूं के अे सगळी बातां कोई टाबर नै सीखावणी घणौ अबखौ काम है, पण म्हैं आपनै अरज करूं के आपसूं जितरौ बणै आवै, आप जरूर कराईजौ। कारण के म्हारौ पुत्र अेक टाबर होवतां थकां आछौ मानव है।

स्रोत
  • पोथी : माणक पारिवारिक राजस्थानी मासिक ,
  • सिरजक : नृसिंह राजपुरोहित ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : मई 1989
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