एक चिड़िया और कौआ आपस में दोस्त थे। एक दिन कौए को लाल (रत्न) और चिड़िया को महंगा मोती मिल गया। लाल रत्न से मोती काफी कीमती था। कौए के मन में लालच आ गया और उसने भोली-भाली चिड़िया से वह मोती हड़पने की सोची। कौए ने चिड़िया से कहा कि वह एक बार उसे मोती देखने के लिए दे। जब चिड़िया ने उसे मोती देखने को दिया तो वह उसे लेकर उड़ गया और नीम की डाली पर जा बैठा। चिड़िया ने उससे मोती वापस मांगा तो कौए ने लौटाने से मना कर दिया। इस पर चिड़िया ने नीम से कौए को उड़ाने की विनती की पर नीम ने ऐसा करने से इंकार करते हुए कहा –  ῾मैं क्यों उड़ाऊं, इसने मेरा क्या बिगाड़ा है।’
यह सुनकर चिड़िया रोने लगी। ῾कौआ मोती दे नहीं, चिड़िया रोती रहे नहीं !’

अब चिड़िया नीम को कटवाने के लिए खाती (बढ़ई) के पास गई और उससे कहा - ῾खाती खाती, नीम काटो !’ खाती ने ऐसा करने से मना करते हुए कहा - ῾मैं क्यों काटूं ? उसने मेरा क्या बिगाड़ा है?’

इसके बाद चिड़िया ने राजा के पास जाकर न्याय की गुहार लगाई और खाती को दंड देने हेतु कहा। राजा ने उसकी बात हंसी में उड़ाते हुए कहा - ῾मैं खाती को क्यों दंड दूं, उसने मेरा क्या बिगाड़ा है?’

इसके बाद चिड़िया रानी के पास गई और उससे राजा से रूठने की विनती की पर रानी ने ऐसा करने से मना कर दिया।


अब चिड़िया चुहिया के पास पहुंची और उसे रानी के शृंगार के कपड़े कुतरने को कहा। चुहिया ने ऐसा करने से मना करते हुए कहा कि रानी ने मेरा क्या बिगाड़ा है जो मैं उसके कपड़े कुतर दूं? चिड़िया ने बिल्ली के पास जाकर चुहिया को मारने की विनती की पर बिल्ली ने ऐसा करने से मना कर दिया। बिल्ली को सबक सिखाने के लिए चिड़िया कुत्ते के पास गई और बिल्ली को मार डालने की गुहार लगाई। कुत्ते ने ऐसा करने से इंकार करते हुए कहा कि बिल्ली ने मेरा क्या बिगाड़ा है?

कुत्ते के जवाब के बाद चिड़िया लाठी के पास गई और उससे कुत्ते को पीटने की विनती की। लाठी ने भी चिड़िया की बात अनसुनी कर दी। इसके बाद चिड़िया आग के पास गई और उससे लाठी को जलाने की प्रार्थना की। आग ने चिड़िया की बात मानने से इंकार कर दिया। इस पर चिड़िया सरोवर के पास गई और उससे आग को बुझाने की विनती की पर सरोवर ने भी उसकी बात नहीं मानी।

चिड़िया ने हार नहीं मानी और हाथी के पास जाकर सरोवर को सूंड से खाली करने का आग्रह किया पर हाथी ने उसकी बात नहीं मानी। हाथी से निराश होकर चिड़िया चींटी के पास पहुंची  और उसके सामने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि वह हाथी की सूंड में घुसकर उसे सबक सिखाए। चींटी ने उसकी बात मान ली और उसके साथ जाकर हाथी की सूंड में घुस गई। हाथी ने खुजली के मारे कराहते हुए चींटी की बात मान ली और सरोवर को सुखाने के लिए तैयार हो गया। उनको एक साथ आया देख सरोवर डर गया और आग को बुझाने को तैयार हो गया। वे जब आग के पास पहुंचे तो आग बुझने के डर से लाठी को जलाने पर सहमत हो गई। इसके बाद चिड़िया और आग लाठी के पास पहुंचे। लाठी ने भी जलने के डर से चिड़िया की बात मान ली और कुत्ते को पीटने के लिए तैयार हो गई। चिड़िया के साथ लाठी को आया देख कुत्ता डर गया और बिल्ली को सबक सिखाने पर सहमत हो गया।

इसके बाद कुत्ता और चिड़िया बिल्ली के पास पहुंचे। कुत्ते के डर से बिल्ली चुहिया को मारने के लिए तैयार हो गई। चिड़िया और बिल्ली को एक साथ आया देखकर चुहिया को भय हो गया और उसने रानी के कपड़े काटने के लिए हां कर दी। इसके बाद चिड़िया और चुहिया रानी के पास पहुंचे और उसके कीमती कपड़े काटने की धमकी दी। इस पर रानी ने कपड़े नहीं काटने की विनती की और राजा से रुष्ट होने पर सहमत हो गई।

अपने घर में कलह होते देख राजा ने चिड़िया की बात मान ली और खाती को दंड देने को तैयार हो गया। राजा के दंड से डरता हुआ खाती नीम काटने पर सहमत हो गया। चिड़िया और खाती को औजारों सहित आया देख नीम कौए को उड़ाने के लिए तैयार हो गया। अपना आशियाना उजड़ने के डर से कौआ चिड़िया का मोती लौटाने के लिए मान गया। लंबे संघर्ष के बाद अंतत: चिड़िया को उसका मोती वापस मिल गया।

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