बरनाला नामक स्थान लालसोट के पास स्थित है। यह एक अतीव प्राचीन स्थल है, जहाँ से महत्त्वपूर्ण पुरातात्त्विक सामग्री प्राप्त हुई है। यहाँ से दो यूप स्तम्भ मिले थे। पहला स्तम्भ चैत्र शुक्ला पूर्णिमा 284 कृत संवत् का है। इसके अनुसार कृत संवत् 284 में सोहर्त गोत्रोत्पन्न वर्द्धन नामक व्यक्ति ने सात यूप स्तम्भों की प्रतिष्ठा का पुण्यार्जन किया। लेख का अंश निम्न प्रकार से है—

 

सिद्धं कृतेहि चैत्रशुक्ल पक्षस्य पंचदशी सोहर्त
सगोतस्य (राज्ञो) पुत्रज्ञस (राज्ञो) वर्धनस्य यूपसत
को प्रष्णव (र्द्धकं भवतु)।

 

ईसवी संवत् 227 में इस यूप की प्रतिष्ठा हुई थी।

 

दूसरा यूप स्तम्भ 278 ई. का है। यह कृत्त संवत् 335 ज्येष्ठ शुक्ला पूर्णिमा का है, जिसमें गर्ग त्रिराज यज्ञ का उल्लेख है। इसका सम्पादन भट्ट नामक व्यक्त्ति द्वारा किया गया था। इस अवसर पर सवत्स 90 गौओं का दान किया गया था। लेख दो पंक्तियों में ऊपर से नीचे की ओर है। इसमें धर्म और विष्णु की प्रशस्ति गायी गयी है। यह अब आमेर संग्रहालय में सुरक्षित है। इसके अन्त में विष्णु वंदना की गयी है। यूप स्थापन विष्णु को प्रसन्न करने के निर्मित हुआ है। यज्ञकर्ता अधिक समृद्ध नहीं है। इसका अंश निम्न प्रकार से है—

 

कृतेहि जय (ज्येष्ठ) बुधस्य पंचदर्श त्रिरात्रं पूगता
इष्टा सव्यस्त (सवत्सा) एव बागा (गवो) दाक्षिण्य
(दक्षिण्याः) दता (दता)
वष्टः (विष्णु) प्रियता धर्मों वर्द्ध (ताम्)।

स्रोत
  • पोथी : जयपुर का इतिहास एवं पुरातत्व ,
  • सिरजक : अज्ञात ,
  • प्रकाशक : राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी ,
  • संस्करण : द्वितीय संस्करण
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