आज 20 सितम्बर 1980 री रात नै इणीज पालम हवाई अड्डै सूं म्हैं फेरूं अेकबार सोवियत संघ री यात्रा माथै जावण सारू त्यार ऊभौ हूं। 8 जुलाई 1969 नै म्हैं इणी पालम हवाई अड्डै सूं जद पैलड़ी बार सोवियत संघ री जात्रा माथै गयौ हौ तो बात सुपना में नीं सोची ही के फेरूं कदैई उठै जावणौ पड़सी। इण वास्तै जयपुर सूं जद दुष्यंत लिख्यौ के म्हनै सोफिया में आयोजित ‘विश्व शांतिजनां री संसद’ में राजस्थान कानी सूं प्रतिनिधि मंडळ में शरीक होय'नै उठै जावणौ है तो म्हैं ना नीं देय सक्यौ।

लारला ग्यारै बरसां में धरती माथै कितरी घटनावां घटित हुयगी, कितरी नवी जूनी पैदा हुयगी, कितरौ बदळाव आयग्यौ। पण इण ग्यारै बरसां में जे कीं हुयौ, बीं में सै सूं महताऊ बात है भारत अर सोवियत संघ रै बिचाळै प्रगाढ़ होवती मित्रता री कड़ी। 1971 में भारत अर सोवियत संघ रै आपसरी में संधि हुई। उण संधि अर दोस्ती री परख सागण उणी बरस 1971 में हुयगी जद पाकिस्तान भारत माथै नापाक हमलौ कियौ अर सोवियत संघ भारत री हर तरै सूं मदद करतां पाकिस्तान रै कुचक नै विफळ कर दियौ।

पैलड़ी बार सोवियत संघ री जात्रा सूं पाछौ आयां पछै म्हैं उण जात्रा रा संस्मरण लिखती वखत वांरी पैलड़ी किश्त रौ शीर्षक दियौ हौ—‘हिमालय रै उण पार अेक मित्र देश में।’ आज पालम रै हवाई अड्डै माथै ऊभां वौ शीर्षक फेरूं याद आवै। आज म्हैं ‘हिमालय रै उण पार अेक मित्र देश’ में अेकर फेरूं जाय रह्यौ हूं। अलविदा गुलाब, अलविदा मनु अर अनु अर वे सगळा साथी जिकौ आज अठै हाजर तो नीं है पण म्हारी उडीक करता रहसी।

काल 21 सितम्बर नै म्हैं सोवियत संघ में होवूंला—इण विचार सागै केई बांता दिमाग में आई। सोवियत संघ वो देश, जिणरा सुपना म्हैं ठेट उण वखत देखणा शुरू किया, जिण वखत म्हनैं भलै-भूंडै री परख नीं ही। जीवण रा उण मोड़ माथै ऊभां सोवियत संघ म्हनै सुरग रै उनमान लखावतौ। पण केई बार म्हारै मन में उण देश रै प्रति कुशंकावां अर वहम पैदा हुय जावता।

इण कुशंकावां अर वहम रौ मूळ कारण हौ सोवियत संघ अर समाजवादी व्यवस्था रै खिलाफ अणूंतौ पूंजीवादी प्रचार। इण प्रचार मुजब सोवियत संघ अेक घोर दमनकारी अर तानाशाही साम्राज्य, जठै स्वतंत्रता नांव री कोई चीज नीं ही। अेक निरी भौतिकवादी, भोगवादी अर आत्म विहीन समाज व्यवस्था ही जठै मरद लुगाई रा संबंध पशुस्तरीय हा। प्रचार रै इण घटाटोप बिचाळै केई बार म्हारै आस्था अर विश्वासरी नींवां हिलण लाग जावती।

इण मनोदशा मांय रात रा तीन बज्यां अेयर इण्डिया रा 707 विमान ‘मकालू’ सूं रवाना होयनै म्हे मास्को पूगस्यां।

21 सितम्बर री प्रभात वेळा में म्हांरौ विमान समाजवादी सोवियत संघ री राजधानी मास्को रै नुंवै हवाई अड्डै ‘शेरेत्येवो’ माथै उतर्‌यौ। अड्डै सूं बारै आवतां अेक मधुर कंठ म्हांरौ सनेव सूं स्वागत कियौ। मधुर कंठ तान्या रौ हौ। तान्या बतायौ के अठै सूं म्हांनै मास्को रै सुप्रसिद्ध होटल ‘यूकेइना’ में लिजाया जासी। होटल खासकर विदेशी मेहमानांरी सुख सुविधा रै हिसाब सूं बण्योड़ौ है।

विमान में बैठती बखत विचार कियौ हौ के विमान जद आधी रात नै मास्को पूगसी तो ऊंघ रै कारण पूरी आंख्यां को खुलै नी पण अठै उतर्‌यां मास्को री चमक-दमक सूं आंख्यां फाटी री फाटीज रैयगी। 15-20 मिनट में म्हे भव्य, विशाल अर आधुनिक होटल में पूगग्या।

राजस्थान सूं 16 प्रतिनिधि गया हा। म्हे मिळ'नै तै कियौ के मास्को देखण वास्तै सगळा जणा बिना कोई गाईड नै सागै लिया मतैई नगर में जास्यां। इण वास्तै केई जणा दुभाषियौ सागै लियां बिना सफा अेकला नगर दरसण वास्तै बारै निकळग्या। सै सूं पैली मास्को रै प्रदूषण रहित निरमळ मुधरै पवन रै परस सूं म्हांरै मन प्रसन्न हुयग्यौ अर शरीर में फुरती सी आयगी। साफ-सुथरी सड़कां माथै मोटर-कारां री भीड़ जरूर ही। पण पगां पाळा चालता मिनख कम निगै आया। जिकौ पाळा चालै हा वां में घणखरा वे लोग हा जिकौ सड़क पार कर'नै भूमिगत मारग सूं दूजी ठौड़ जावण वाळा हा। इसौ की नीं लखायौ के वो मास्को नगर है जठै री स्थाई जनसंख्या 80 लाख है अर 20 लाख लोग आवता-जावता रैवै।

इतरी विशाळ जनसंख्या वाळै मास्को नगर री सड़कां माथै मिनखां री कमी अर वाहनां री बोहळाई देखनै इसौ लागै हौ जाणै कारां, मोटरां अर बसां रौ सहर है। पण थोड़ीक ताळ में म्हनै जाणकारी हुयगी के अठै रौ घणखरौ मानखौ भूमिगत रेल मारग में ‘मेट्रो’ सूं जात्रा करै। हर दो तीन मिनट बाद तूफानी चाल सूं आवणवाळी बिजळी री रेल गाडियां मास्को वासियां रौ प्रमुख वाहन है। कमाल है। अठै री अे रेलगाडियां इतरी साफ सुथरी अर इतरी आराम दायक के देखतां जीव सोरौ होय जावै। रात दिन रा 14 घंटां में फगत 4 घंटा अे गाडियां बंद रैवै, बाकी चालती रैवै। जमीन सूं 150 मीटर नीचै चालण वाळी इण गाडियां में बैठण वास्तै आप 5 कोपेक देय'नै मेट्रो रा कोई पण टेसण माथै गाड़ी पकड़ सकौ अर इण भाड़ै में आखौदिन अर आखी रात मास्को री जात्रा कर सकौ। जठा तांई आप अेलिवेटर माथै पग देय नै पाछा बारै सड़क माथै आवौ उठा तांई पांच कोपेक रा भाड़ा में आप निरन्तर जात्रा करण रा अधिकारी हौ।

इण भूमिगत मेट्रो गाडियां री अेक दुनिया न्यारी। मेट्रो रौ हरेक टेसण चमाचम करतोड़ौ साफ सुथरौ मिळसी। हरेक डिब्बौ सुविधापूर्ण अर साफ के हाथ दियां दाग पड़ै। गाड़ी में चढ़ण-उतरण री व्यवस्था इतरी सुविधाजनक अर व्यवस्थित के कोई भीड़-भड़ाकौ नीं, कोई धक्का-मुक्की नीं। मेट्रो व्यवस्था मास्को नगर री रगतवाहिनी नाड़ी तंतु रै उनमान है। मेट्रो में जात्रा करती वेळा घणा सुखद अनुभव होवै। उछाव अर उमंग सूं भर्‌या खुशहाल चेहरां वाळा मास्को वासी भीड़ में स्वनियंत्रित रैवै। अेक कल्पनातीत अनुभव हौ।

आज 22 सितम्बर 1980 नै रेलगाड़ी सूं मास्को सूं सोफिया री जात्रा रौ दूजौ दिन हौ। काल आधी रात नै जद सितम्बर रौ 21 वां दिन प्रारम्भ हुयौ। रुमानिया सूं गुजर रह्या हा। इण वखत 10 बजनै 15 मिनट (मास्को टाईम मुजब) माथै म्हे रुमानिया रै अेक टेसण माथै हा। मास्को में होटल सूं बारै निकळ्या जद कीं ठंड जरूर ही पण अवै तो मौसम घणौ सुहावणौ है।

सोवियत संघ में म्हारी पैली रेल जात्रा है। कुल जात्रा 44 घंटां री होसी। म्हारै इण कंपार्टमेंट में दो जणां रै सोवण री व्यवस्था है। कक्ष नैनौ होवतां थकांई सुविधावां इण में सगळी है। भारत री रेलगाडियां री प्रथम श्रेणी सूं बेसी सुविधा जनक कक्ष है ओ। पगां हेटै गलीचौ, हाथ-मूंडौ धोवण नै वाशबेसिन, जिण माथै ढाकण आयां ओपतौ टेबल बण जावै, ऊपर नैनी सी'क अलमारी, जिण में पीवण रै पाणी सारू जग अर काच रा गिलास। सीट रै नीचै सामान राखण री सगवड़, बुगला री पांख रै उनमान सफेद भक्क बिस्तर, ओपता पड़दा, कांबळ! अठै प्रथम अर द्वितीय श्रेणी में कोई फरक कोनीं।

रेल में खावण-पीवण री व्यवस्था है। मोकळौ माखण, पनीर रोटी—काळी-सफेद, जेम, फळ, अंडा, साग-सब्जियां, सै कीं। म्हांरी दुभाषिया महिला म्हांनै सगळौ कार्यक्रम समझाय देवै अर म्हांरी सुख सुविधा रौ पूरौ ध्यान राखै। वा मास्को विश्वविद्यालय सूं भाषा विज्ञान री स्नातक, अर अंग्रेजी-फ्रेंच री जाणकार है।

मास्को अर रुमानिया बिचाळै ठेट तांई मारग रै दोनूं कानी आभै सूं बातां करती इमारतां अर नीला कच हरिया दरखत। ठेट तांई हरियाळी हरियाळी—जाणै वसुंधरा हरियै रंग री पोशाक में बमी ठगी। धरती रौ रूप देख’र साफ लखावै के मैणती अर कुशळ हाथां री कारीगरी है।

इण मन मोवणी हरियाळी रै बिचाळै मरद, लुगायां अर टाबर, सगळां रा पळकता चेहरा, उन्नत मस्तक अर स्वस्थ निरोग शरीर। आप रै भुजबळ री कमाणी सूं धरती नै सुरग बणावण वाला है अे लोग। यां नै देख’र मन में उमंग अर उछाव पैदा होवै।

रात नै रेल सूं रवानै होवण पैली म्हे करीब 12-14 घंटा मास्को में ठैर्‌या। दिल्ली सूं रात रा तीनेक बज्यां (भारतीय समय मुजब) रवाना होय नै अेयर इण्डिया रै 707 विमान ‘मकालू’ सूं म्हे मास्को समय मुजब 7 बजनै 15 मिनट माथै ठेट पूगा हा। इण विमान में भारतीय प्रतिनिधि मंडळ रा 151 सदस्य हा। मास्को में उण वखत तापमान 9 डिग्री सेंटीग्रेड हौ। हवाई अड्डै सूं म्हांनै होटल रूस में लेयग्या। होटल अबार कीं बरसां पैलीज बण्यौ है। छ: हजार बिस्तरां वाळै इण होटल में सगळी सुख-सुविधावां मौजूद है। अेक अर दो बिस्तर वाळै कमरां में रेडियो, टेलेविजन, टेलेफोन, आरामदायक फर्नीचर अर ठंडै-गरम पाणी इत्याद री सगळी व्यवस्था है। होटल रौ सगळौ प्रबंध लुगायां रै हाथ में हौ।

तीन बज्यां बसां में बैठ’र मास्को दरसण शुरू कर्‌यौ। सै सूं पैली म्है ‘लालचौक’ गया। अेक कानी सेंट वेसल रौ गिरजौ आयोड़ौ है, जिणरौ निरमाण 16 वीं सदी रौ है। उण वखत री स्थापत्यकला रौ अेक उत्तम नमूनौ है। लाल अर सोनै री रंगां में इणरौ फूटरापौ देखतां बणै आवै। इणरै दूजी कानी है केमलिन, जिकौ कोई जमानै में जार राजावां रौ निवास स्थान रह्यौ अर आज वौ इज समाजवादी शासनतन्त्र रौ मुख्यालय है। लाल भाठै सूं निर्मित इण विशाल केमलिन अर सेंट वेसल गिरजै रै सामी अेक भव्य भवन है, जठै मास्को रौ मोटौ बाजार है। केमलिन रै अड़ौअड़ रूसी क्रांति रा सूत्र धार लेनिन री समाधि आयोड़ी है, जठै आज वांरौ पार्थिव शरीर मौजूद है। इण ठौड़ सगळी दुनिया रौ मानखौ रोज श्रद्धासुमन चढावण नै आवै। मार्क्सवादी दर्शन नै मूर्तरूप देवण वाळा लेनिन नै इण देश रा लोग घणो आदर मान देवै। पण वां नै भगवान के देवता रै रूप में नीं पूजै। वे उणांनै मेधावी, कृतसंकल्प अर अेक कर्मठ भविष्य दृष्टा रै रूप में आदरै। बस में सफर करती वखत इसा केई महापुरुषां री मूरतां निगै आई, जिणां रौ इण महान देश रै निर्माण में लूंठौ योगदान रह्यौ। इण महापुरुषां के अेक कानी कांतिदृष्टा मार्क्स अर अेंगल्स जिसा राजनीतिज्ञ है तो दूजी कानी सुप्रसिन्न साहित्यकार मायकोव्सकी अर गोर्की मौजूद है।

मास्को 80 लाख री आबादी वाळौ नगर है। अठै आभै सूं पढ़ती इमारत अर विशाळ औद्योगिक प्रतिष्ठानां रै बिचाळै हजारूं बाग बगीचा अर असंख्य झाड़बीट आयोड़ा है जिणासूं वायु प्रदूषण रौ खतरौ अंगांई कोनीं।

नगर रै बीच आयोड़ी है मास्को नदी, जिणरौ जळ दुनिया री सगळी नदियां पांत निर्मळ अर साफ है।

मास्को दरसण में छेहलौ स्थान हौ लेनिन हिल। अठै सूं अेक कानी मास्को विश्वविद्यालय रौ भव्य भवन निजर आवै तो दूजी कानी मास्को नगर।

जिण वखत म्हे लेनिन हॉल में हा तो उठै सजी सजाई करां री केई कतारां आई। इण कारां में नुंवा परण्योड़ा बींद-बीनणी अर जानी हा। ब्याव पंजीयक ऑफिस में पंजीबद्ध हुयां पछै सगळा जोड़ा लेनिन री समाधि माथै आपरा इष्ट मित्रां सागै आवै अर मास्को नदी रै पुल माथै ऊभा होय नै मास्को नगर रा दरसण करै। अठै आम रिवाज है। ब्याव हुयां पछै आपरी मायड़ भोम नै निमण कियां पछै वे आपरै विवाहित जीवण रौ श्रीगणेश करै।

मास्को दरसण रौ छेहलौ कार्यक्रम हो भूमिगत रेल री जात्रा। म्हैं इणनै कार्यक्रम मानां, कारण के अेक यंत्र में पांच कोपेक रा सिक्का नांख’र अेस्केलेटर सूं जमीन में 150 मीटर नीचौ उतर'नै कोई साफ सुथरै रेल्वे टेसण माथै पूगणौ अेक सुखद अनुभव हौ।

स्रोत
  • पोथी : माणक पारिवारिक राजस्थानी मासिक ,
  • सिरजक : मरुधर मृदुल ,
  • संपादक : पदम मेहता ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन
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