जे चित्रकार बणो जणै तो तुलिका अर कागद रंग हुवै रै।

संगीतकार हुवो मिनखां बहु साज’र बाजण संग हुवै रेै।

और अनेक कला जिण मं खरचौ रिपिया हद ढंग हुवै रै।

सो कविता ही मुकेस करै हिव में बस भाव उमंग हुवै रै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
जुड़्योड़ा विसै