तेरी अल्प आयु तूं तो खेलता है डाव,
जांणै है जीवन मेरो कबहुं न तूटैगो।
यौ तो है नदी का पूर दिन दिन घटै नूर,
करत अकाज नहीं लाज कैसै छुटैगो।
कंठगति प्रांण तेरै व्हैगे बल प्राण घेरे,
आइ जमरांण जब तोकूं गहि कूटैगो।
कहै जिनहरख न कोउ तेरो रखवाल,
देखत ही काल ठाल काया कोट लूटैगो॥