काज मिलै अनाज अठै जिण कारण सूं दुख यो अधरां पै।

बांध लिया गठरी उण पोट’र लाद लिया खुद आप सरां पै।

अेक जगां सब अेक हुया’र लगाकर आगळ आज घरां पै।

छोड़ गुवाड़ मुकेस अबै तक गांव चल्या नगरां डगरां पै।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : मुकेश आमेरा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
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