काज मिलै न अनाज अठै जिण कारण सूं दुख यो अधरां पै।
बांध लिया गठरी उण पोट’र लाद लिया खुद आप सरां पै।
अेक जगां सब अेक हुया’र लगाकर आगळ आज घरां पै।
छोड़ गुवाड़ मुकेस अबै तक गांव चल्या नगरां डगरां पै।