मिनख पणां रा
विकास री सींव
म्हानै अैंया देखी
अेक पढ्या-लिख्या
दहेज-लोभी न
आतमहत्या रो
स्टाम्प मंडवा’र
छत सूं आपरी ही
लुगाई फेंकी।