वा बोली—

ईं चाल सूं

वाहन बढ़ता रैया

तो सांस लेबो

अर सड़क चालबो

हो जावैगो मुस्कल।

म्है बीच ही कैयो—

‘फकर मत कर बावळी!

इक्कीसवीं सदी रौ

वाहन छै साईकल।’

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : हलीम ‘आईना’ ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 19
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