बजर अंग बजरंग, राम दूत रामाति प्रिय।

भरत-बाण ते भंग, पण कुण कैवै पांगळो॥

साधां में सिरमौड़, पौराणिक गाथा पढ़ी।

अष्टावक्र अजोड़, पैली पंगती-पांगळो।

पल-पल प्रेमाखण्ड, पूजनीक परमारथी।

पावै परमानंद, प्रेमामृत पी पांगळो॥

पाप पुण्य पाखंड, परहित पथ पावन परम।

पग-पग पर पैबंद, पण पुरुषारथी पांगळो॥

आंख्यां में अंधियार, सूरदास सा संत कवि।

अन्तस रै आधार, परमानन्दी पांगळो॥

देव चिकित्सक दोय, अश्विनियां अद्भूत करी

हृष्ट पुष्ट तन होय, पड़्यो इन्द्र जद पांगळो॥

अकबर फौज अथाह, चढ़ चाल्यो चित्तौड़गढ़

गोळी बणी गवाह, पड़्यो जयमल पांगळो॥

लंगड़ो नीं लाचार, समाज में सर्वोपरि।

वीं पर लाखूं वार, परोपकारी पांगळो॥

चित्रकला चितराम, अति उत्तम उभरै इसो

लंगड़ो-लंगड़ो आम, परम रसीलो पांगळो॥

हाथ एक हरिदेव, लोकतंत्र रो लाडलो

बनवास्यां वरदेव, प्रजापाल पण पांगळो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवदयाल पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-28
जुड़्योड़ा विसै