सावण उठै हिलोर, रिमझिम-रिमझिम टीबडां।
नांचै मुळकै मोर, रास रमै तू मोलका।
बालम तोड़ै तान, खेत रूखाळै गोरड़ी
टीबो देकर कान, गुट-गुट सुणर्यो, मोलका।
दरब-रतन री खान, टीबा तू चुप क्यूं पड़्यो।
तू भी दिखा गुमान, दुनी जाणज्या, मोलका।
टीबां रै मन पीड़, डोळ बिगाड़ै लोगड़ा।
मारै घणां भचीड़, आब उतरगी, मोलका।
टीबा घणा उदास, कटर्या उड़र्या बिगड़र्या।
के बचणै री आस, गैल लोगड़ा, मोलका।