धूं-धां उठै धमोड़, ओळा-सा गोळा पड़ै।
मुड़-मुड़ पड़ै गदीड़, बीर झूझर्यो, मोलका।
भट मिल मार भचीड़, पळ में खोसै पांखड़ा।
पड़ी पांगळी पीड़, रण-खेतां में, मोलका।
कीरत रा कमठाण, सत रा साधक सूरमा।
पळ में देवै प्राण, देस धरम हित, मोलका।
सगळै उग्गी सूळ, आजादी रै आंगणै।
चुग-चुग फैंक समूळ, मरद-पूत तूं मोलका।
सूंसावै सरणांट, सरणबट्ट गोळ्यां चलै।
गोळां रो गरणांट, वीर उपाड़ै, मोळका।