धूं-धां उठै धमोड़, ओळा-सा गोळा पड़ै।

मुड़-मुड़ पड़ै गदीड़, बीर झूझर्‌यो, मोलका।

भट मिल मार भचीड़, पळ में खोसै पांखड़ा।

पड़ी पांगळी पीड़, रण-खेतां में, मोलका।

कीरत रा कमठाण, सत रा साधक सूरमा।

पळ में देवै प्राण, देस धरम हित, मोलका।

सगळै उग्गी सूळ, आजादी रै आंगणै।

चुग-चुग फैंक समूळ, मरद-पूत तूं मोलका।

सूंसावै सरणांट, सरणबट्ट गोळ्यां चलै।

गोळां रो गरणांट, वीर उपाड़ै, मोळका।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : उदयवीर शर्मा ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-17
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