बिहुँवे थोक अबीहे, रण मटवो नटवो रसण।

सो तो बळवँतसीह, जीयौ जितै जाणियौ॥

स्रोत
  • पोथी : प्राचीन राजस्थानी गीत (भाग – 5) ,
  • सिरजक : चंडीदान मिश्रण ,
  • संपादक : हनुवंत सिंह देवड़ा ,
  • प्रकाशक : साहित्य संस्थान, राजस्थान विश्व विद्यापीठ, उदयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम