राजस्थानी सबदकोस

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मनु रो राजस्थानी अर्थ

  • शब्दभेद : सं.पु.

शब्दार्थ

  • ब्रह्मा का पुत्र जो, मानव सृष्टि का प्रवर्तक आदि पुरुष एवं समस्त मानव जाति का पिता माना जाता है। वि.वि.--यह यज्ञ प्रथा का आरंभकर्ता माना जाता है। ऋग्वेद के अनुसार विश्व में अग्नि प्रज्वलित करने के बाद सात पुरोहितों के साथ इसने ही सर्वप्रथम देवों को हवि समपित की थी। मनु ने सभी लोगों के प्रकाश हेतु अग्नि की स्थापना की थी। मनु का यज्ञ वत्रमान यज्ञ का ही प्रारंभक है क्यों कि इसमें बाद जो भी यज्ञ किये गये उनमें इसके द्वारा दिये गये विधानों को ही आधार मान--कर देवों को हवि समपित की गयी। बड़अन्य विधान भी इसी के अनुसार किये जाते है कई विद्वानों ने इसे तथा 'मनु बैवस्वत' को एक ही माना है, परन्तु इसमें काफी मतभेदहै। (च.को.)
  • चौहद मन्वंतरों के अधिपति। वि.वि.--पुराणानुसार ब्रह्मा के एक दिन और रात को कल्प कहते है। इनमें ब्रह्मा के एक दिन के चौहद भाग माने गये है। प्रत्येक भाग को एक मन्वंरत कहते है। प्रत्येक मन्वन्तर के काल में सृष्टि का नियंत्रण करने वाला मनु अलग होता है और इसी के नाम से मन्वंतर का नाम--करण किया गया है। अत: ये चौदह मन्वन्तर एवं मनुओं के नाम इस प्रकार है।--
  • स्वायंभुव