पहिलउं रिसह जिणंदु नमवि भवियहु ! निसुणहु रोलु धरेवि॥
बाहूबलि केरउ विजउ॥
सयलह पुत्तह राणिव देवि। भरहेसरू निय पाटि ठवे वि॥
रिसहेसरि सिंजमि थियउ॥
वरिसु जाउ दिणि दिणि उपवासु। मूनिहि थाकउ वरिस सहासु।
इव रिसहेसरि तपु कियउ॥
तो जुगाइ-देवह सुपहाणु। उप्पन्नं वर केवल-नाणु॥
चक्कु रयणु भर हेसरह॥
भर हेसरू जिण वंदण जाइ। रिद्धि नियंती अंगि न माइ॥
मरु-देवी केवलु लहइ॥
तो थक्की दिगु-विजउ करेवि। भरहेसरू राणा मेलेवि॥
अवझा-नयरिहि आइयउ॥
तो सेणावइ कहियं देव ! तज्जउ आउह-सालह अेव॥
चक्कु रयणु नउ पइसरइ॥
भरहु भणहु कुन मन्नइ आण। देवबन्धु सवि खंध सवाण॥
बाहुबलि पुण आगलउ॥
बन्धु बाहु ! तुम्हि आजु-इ आजु। करउ आण कय छंडउ राजु॥
भरहि दूय पठावियउ॥
तो बंधव गय तापह पासि। सव्वे केवलि हुय गुण रासि॥
राहू बलि मंडिउ थियउ॥
पहु भर हेसर अेव, बाहु बलिहि कहा वियउ।
जइ बहु मन्नहि सेव, तो प्रवणउ संग्रामि थिउ॥
गरूया अेकइ नांव, दूवोलिहिं गंजण वडिय।
सो बाहुबलि तांव, दूअइ गलइ लियावियउ॥
सो बाहुबलि वाणि, संभलेवि अवझह गयउ।
भरह तणइ अत्थाणि पणमेविउ दूअउ भणइ॥
मइं लाधं तहि ठामि, महेसरूं जं करइ।
अवरूइं सांभलि सामि वाहु बलिहिं कहावियउं॥
खंतह गांगह तीरि दउड़ जेब उच्छालियउ।
घाउ भ होउ सरीरि पड़त उदय करिझालियउ॥
तं वीसरियं आजु, भरहेसरू मय भिंमळउ।
जइ करि लाधउ राजु तकि अम्ह सेव मना विस्थइ॥
गंग सिंधु दुइ रांड अनु जइ नाहल साहिया।
अे तीणइ छइ खांड जीतउं मानइ भाभटउ॥
अेरिस वयणुसुणेवि विलि-विलि हुंतिन गोहडिय।
अंगूठइ टेरेवि बाहुबलि वाहा-बलिहि॥
अेत्थं तरि नह गामि आवै विणु नार उभणइ।
तलि महियलि अरूसागि नउ थी बाहुबलि संवउ॥
कोवानल पज्जलिउ ताव भरहेसरू जंपइ।
रे रे दियहु पियाण ठाक जिमु महियलु कंपई॥
गुलु गुलंत चालिया हाथि नं गिरवर जंगम।
हिंसा-रवि जहि रिय दियंत हल्लिय तुरंगय॥
धर डोलइ खळभळइ सेनु दिणियरू छाइज्जइ।
भर हेसरू चालियउ कटकि कसु ऊपम दीजइ॥
तं निसुणे विणु बाहुबलिण सीवह गय गुडिया।
रिणरहसि हिच उरंग दलिहि वेउ पासा जुडिया॥
अति चाविउं पाडरं होइ अति ताणिउ त्रूटइ।
अति मथियं होइ कालकूट अति भरियं फूटइ॥
मंडळियउ बाहूबलि मणइ मन मरइ अखूटइ।
जो भुयदंडह पड़इ पाखि सो किमुइ न छूटइ॥
देव-सूरि पणमेवि सयलुतिय-लोय वंदीतउ।
वयरसेण सूरि भणइ अेहु रण रंगुजु वीतउ॥
तापहिलइ रिण-रंगि अनलु वेगु तहि झूझियउ।
पड़ियउ भंगो-भंगि आगि वाणि भरहह तणइ॥
काहं लूया कूच काहं माथा मूंडिया।
केवि किया खर छूच विज्जा हरि विज्जा बलिहि॥
इण परिजउ भड़वाउ मउड वधा ऊतारियउ।
तउ भरथेसरू राउ आपणि ऊट वणिय, करइ॥
तावह विज्जु पथंडु अनलवेगु नह-यलि गयउ।
मोडिवि तिणु धय-दंडु भरहेसरू विलखड कियउ॥
चक्किहिं छिंदइ सीसु भरहेसरू विज्जा हरइ।
इण रण रंगि जु वीतु देवा हइं नइवीसरइं॥
तो बहु जीव संहारू देखेविणु बाहु बलिण।
भणियं पर-बल सारू मुज्झुवि तुज्झवि लागठइ॥
जइ बूझसि तउ बूझि काइं मांडलिअे मारिअे।
पहरण पाखइ झूझु अंगो अंगिहि कीजिसइ॥
तउ धुरि जोवंताहं आखिहि पाणिउं आइयउ।
बादहि बोलंतांह भरथहि पाडिऊतरू नहि॥
झझु वि भुअ-दंडेहि मल्ल झूझुतहिं निम्मियं।
मूठिहिं अरू दंडहि भरहु जीतु बाहू बलिहिं॥
तो चिंतइस-विसाउ जो दाइयहं दूवलउ।
तहि कहियउ राउ चक्क रयणु तह सुमरियं॥
करियलि चक्कु धरेवि जाल-फुलिंगा मेल्हतउं।
मूकइं बलि अक्खेवि प्रवहइ नाहइं गोत्रियह॥
तावइं भणइ हसेवि बाहुबलि भरहेसरह।
अेकह छू मर देवि, चक्क-रयणि सउं निद्दलउं॥
पुण तं भट्ठ पयंतु तउ मइं मूकउ जीवतउ।
मइ पुणु किउ सामंतु पंचह मूठिहि लोचु किउ॥
तो पाअे लागेवि भर हेसरि मन्नावियउ।
बंधव ! मुज्झु खमेहि तइं जीतउ मइं हारियउ॥
ऊतरू ताव न देइ बाहुबलि भरहेसरह।
राणे सरिसउ ताव भरहेसरू धरि आइयउ॥
पहु भरिहेसरि राइं रिसह जिणसरू पूछियउं।
ह बाहूबलि भाइं सामिय काइं हरावियउ॥
तउ महुरक्खर वाणि (अे) रिसहनाहु पहु वज्जरइ।
कारणु अवरू म जाणि (अे) पुव्व-किवं परि परिणामइ॥
पंचपूत अम्हि आसि (अे) वयरसेण तित्थंकरह।
राजु करि वि तहिं पासि (अे) तपु किउ अम्हि निम्मळउ॥
मइं तहिं तित्थयरत्तु (अे) तइं पुणु वाधउं भोग-फलु।
मुणिहिं मलेविणु गातु (अे) वाहूबलिहि॥
वंभी सुंदरि बेवि (अे) मायाकरि हुई जुवई।
भवियहु इहु जाणेवि (अे) माया दूरिं परिहरउ॥
बाहूबलि हू नाण (अे) माणि पणडइं तउ हुयउं।
अवरुम करिसउ माणु (अे) वयरसेण सुरि वज्जरइ॥
भावण तिंव भावेउ जिंव भावि भरहेसरिहिं।
तउ केवल पावेहु (अे) राजु करंता तेण जिंव॥