पात्र

स्योप्रसाद – कस्बै को सबसै बड़ौ व्यापारी उमर 50 बरस
तारा – स्योप्रसाद की घर वाळी उमर 45 बरस
घनश्याम – स्योप्रसाद को बेटौ जीकै को इब ई ब्या’व होयौ है उमर 22 बरस
बीनणी – घनस्याम की बीनणी उमर 20 बरस
मीना – घनस्याम की भाण (बैन) उमर 12 बरस
रामेसर – स्योप्रसाद को पाड़ोसी उमर 40 बरस
मामकोर – रामेसर की भाण (बैन) उमर 35 बरस
स्थान – स्योप्रसाद को घर
समय – दिन रा 11.00 बज्यां।

(पड़दौ उठतांई स्योप्रसाद कै घर की तिबारी दीखै है। सामनै बिलंगणी कै घाबा सूकै अर बीच में अेक निवार को पिलंग बिना चादरौ बिछयां पड़्यौ है। पिलंग कै बांअें कानी दो सरूप-सी कुरसी और दांअें कानी दो नूवां मुड्ढा पड़्या है। स्टूल पर गोळ लोटौ पाणी को भर्‌यो पड़्यौ है। स्योप्रसाद हाथ में छातौ लियां आवै है। सिर पर टोपी काळी और टेरालीन को चाळौ अर पतळी धोती बांध्यां। बाटा की काळी जूती पैर्‌यां। आवतां ई चोळौ उतार के खूंटी पर टांग दे है अर टोपी मांचै पर अेक कानी मे’ल दे है। जूती निकाळकै पिलंग पर बैठज्या है। कन्नै बीजणौ पड़्यौ है ऊनै उठा’कै पून घालण लागज्या है– दूसरी कानी सै तारा सिकंजी को गिलास लियां छोटौ-सो घूंघटौ काढ़्यां आवै है– आवतां ही स्योप्रसाद नै गिलास पकड़ा दे है। स्योप्रसाद अेक सांस में गिलास पीज्या है, तारा बीजणौं उठा’कै पून घालण लागज्या है।)

स्योप्रसाद – भोत गरमी सारौ सरीर खीचड़ी की ज्यूं खदबड़-खदबड़ सीजण लागगौ। अेक दो आसामियां कन्नै गया था उगाई खातर पण पार कोनी पड़ी। अेक बेमार मिल्यौ अर अेक भद्दर होयौ मिल्यौ। चीज उधार देल्यौ अर बैर मोल लेल्यौ।

तारा – (जोर-जोर सैं पून घालकै) इसै तावड़ै में थांनै जाण की के जरूरत थी। घनस्याम नै भेज देता।

स्योप्रसाद – घनस्याम कै के पीतळ की टाट है जिकौ तावड़ौ कोनी लागै। बावळी, आजकाल का छौरा अर बै बी ब्या’योड़ा कैनै रसीद दे है। बै तौ हिरण की ज्यूं कुलांच भरता डोलै।

तारा – (कन्नै पड़ी कुरसी पर बैठकै) न्यारा ई कुलांच भरै। मेरौ छोरौ इसौ कोनी, घणौ ई सूदौ और आग्याकारी है। पण थे जरूर उंकै लैर्‌या हिरणी लगा दी, बा कुलांच भरती डोल री है। रामारया पीसा ई देख्या, छोरी नै कोनी देखी।

स्योप्रसाद – छोरी के न्यावू है। बुलबुलियै की जात है। चांद सरीसौ मुखड़ौ, खंजन जिसी आंख अर चंदण बरकौ सरीर है। फेर इसै रूप कै सागै 20 हजार रोकड़ी, इसौ सम्बन्ध तौ सुभागियै नै ई मिलै।

तारा – सरूप नै के चाटां रै बाबा, बैंकी बोली में बारा आना लागै म्हनै तौ, गिटपिट-गिटपिट बोलै, म्हारै अेक आखर ई माथै में कोन्या बैठै।

स्योप्रसाद – (हांसकै) बा हिन्दी बोलै– आपणी देस की भासा। माथै पर जोर दिया कर, समज में आवण लागज्यागी।

तारा – आपां बोलां या ई सावळ है अर या बी तौ आपणै देस में ई बोली जा है।

स्योप्रसाद – या मारवाड़ी है। कड़कड़ी बोली। बा हिन्दी है– अेक काम तौ चोखौ होगौ– बीनणी काल आई है– काल सैं घर में आछी चैळ होरी है। आपां बी धीरै-धीरै बीनणी की ज्यूं बोलणौ सीख ज्यावांगा।

तारा – बूढ़ा तोता म्हैं पढ़्या कोनीं देख्या। आपणै तौ तुमत ही होगी। आवतां ई अंगरेजी छांटण लागगी, बोली लेटरिंग किधर है? म्हैं ऊंकै आगै लालटण चास के धरदी, बा झाळ में आगी अर बैंकौ लाल मूंडौ होगौ। च्यारूं कानी दैखकै सांपण की ज्यूं फुंफकारण लागगी।

स्योप्रसाद – (हांसकै) आछ्या मोथा भेळा होर्‌या है। इतणी सी बात कोनी समज में आई। लेटरिंग मानी रसोई, बैनै रसोई दिखा दी होती। छोरी सुपातर है, आवतां ई रसोई पूछण लागगी।

तारा – थे बी खूब अटकळ लगाई! आपरली मीना बोली– भाभी तो सन्डास पूछै है। बा’ई बीनणी नै निमटा कै ल्याई।

स्योप्रसाद – (झैपंकै) कहता होगा – म्हैं अेक बर कलकत्तै गयौ जद लेटरिंग रसोई नै कैता, इब सन्डास नै कैता होगा– कारण भासा तौ बगतौ पाणी है– बदळतौ ई रैवै।

तारा – इब मनै के बेरौ, मेरै भावै तौ काळौ आखर भैंस बरोबर है। आपरली मीना जै नै होती तौ सासू-भू की राड़ हो ज्याती। या छोरी पांचवीं में पढै है, अें वास्तै थोड़ी-सी गिटपिट जाणै है।

स्योप्रसाद – जैं बखत टाबरां नै धमकावै, बैं बखत तूं भी कोई अंगरेजणी सै कमती कोनी लागै, ऊं बखत तेरौ रूप देखणै लायक होज्या है– और जद म्हानै धमकावण लागज्या ऊं बखत साच्छात् भारत माता सी लागण लागज्या है।

तारा - रैण दौ जी, थांरौ काम करौ! पसेव सूकगा होगा। न्हाल्यौ, क्यूं देई नै सिजावौ हौ (आप कानी पंखौ झळकै) या रामारी गरमी के व्हैगी, स्योकिमी सीजरैयौ है।

स्योप्रसाद – ले भई न्हावां। (बनियान निकाळै है, तारा गिलास लेकै भीतर चली जा है) बैयां काल न्हाया था। इब रोजीनां न्हाणौ पड़ेगौ– घर में नूंई बीनणी आगी नै (बीना नै आवाज दे’कै) बेटा बीना, साबण की बट्टी ल्यायै दिखां।
(ल्याइ.., बापू की आवाज कै सागै बीना हाथ में बट्टी ले’कै आवै है अर आपकै बापू नै देदे है)

स्योप्रसाद – (साबण सूंगकै) क्या बात है, अैंमै तौ अन्तर की-सी बास आवै है, या कठै सै ल्याई बेटा, और दिनां तौ खुड़ताल छाप लठै हाळी साबण पकड़ाता।

बीना - भाभी दी है बापूजी, बोली ये साबण थारै बापूजी नै पकड़ायावौ।

स्योप्रसाद – (ओज्यूं साबण सूंग कै) मैंगो दिखै! लै भई स्योप्रसाद गरमी में डील को चिड़पड़ाट ई कोन्या मिटै, पसेवां की बास इसी आवै कै कन्नै बैठणियौ या जाणै कै कन्नै ई अमर बकरौ बैठ्‌यौ है। आज म्हारी काया जरूर सेती निरमळ हौ ज्यासी, तेल बी ल्याई होगी तेरी भाभी।

बीना – हां बापू, केन्थराइडिन की 6 सीसी है, वोळा सारा कांगसिया अर 5 कतरणी..

स्योप्रसाद – नाई की दुकान खोलैगी कै.. न्ह्याल होगा, घणौं ई दायजौ ल्याई है बीनणती, तकदीरां की बाजै है नी तौ आपणै घनस्याम को भरै बजार मोल कै? पण यारां की करामात (छाती पर हाथ मारकै) जा बेटा तेरी भाभी कन्नै जा खेल।

बीना – थे भीतर जावौ बापू, म्हें भाभी नै उरै ई बुलाल्यूं, भीतर गरमी भोत, उरै तिबारी में पून लागैगी ।

स्योप्रसाद – आछ्यौ बेटा, म्हैं जार्‌यौ हूं, थे उरै आराम करौ अर स्याणीं-स्याणीं बात करौ।

(स्योप्रसाद भीतर चल्यौ जावै है)

बीना – (कुरसी कन्नै सरकाकै) भाभीजी! अठै आज्यावौ, भीतर हुम्मस सै आपकै चूंटाचांटी लाग रही होसी?
(बीनणी नाक ताणी को घूंघटो काड्यां धीरै-धीरै आवै है अर कुरसी पर बैठज्या है)

बीनणी – बड़ी गरमी है, यहाँ तो मेरा दम घुटता है। घर में बिजली होते हुए भी आप लोग इतना कष्ट भोग रहे हैं?

बीना – आठै तौ बीजणौ है, इससै ई पून घालल्यौ भाभीजी। भाई साब अेक बार पंखा लगाणै की बात करते थे पण बापू और मां कै कोन्या जची। मां बोली खरचै सैं आपणी बैकूंटी निकळ ज्यासी।

बीनणी – बैकूंटी क्या?

बीना – क्या बेरा! मां कैती थी।

बीनणी – आज आनै दो आपकै भाई साहब कौ, पंखे बिना तो जीना दूभर हो रहा है, घर पर मेरा अलग एयर कन्डीसन्ड कमरा था।

(तारा आवै है, आवती आवती अेयर कन्डीसन्ड सबद सूणले है)

तारा – न्यारौ ई कमरौ थौ। उठै भाण भायां में कुण तन्नै धरमसाळा दे थो। छोरी की जात नै कुण कमरा बक्सै है। रैण दै ये बिरा क्यूं चाचरौ ऊपरनै करै हैं। दो आंक के पढ़गी, क्हनै बदै ई कोनी।

बीनणी – आपको विश्वास नहीं आता माताजी । हमारे घर पर सब को एक-सा समझते हैं। लड़के-लड़की में कोई भेदभाव नहीं रखते।

तारा – रैण दै, बस ज्यादा क्यूं सफाई देती है। कदै आदमी लुगाई अेक से हुयै है। आदमी नौ हत्था ना’र होता है। लुगाई गादड़ी की जात, घूरी खोदती फिरती है।

बीनणी – गादड़ी क्या होती है?

बीना – अेक गादड़ा होता है, उसकी भू को गादड़ी कहते है– गादड़ी घूरी में रैती है।

बीनणी – मुझे गादड़ी क्यों कहते हैं? आजकल औरत किससे कम है? सारे देश का शासन तंत्र एक औरत ने संभाल रखा था। अपने आपको मर्द कहने वाले लोगों की मूंछें नीची हो चुकी है।

तारा – कैणै से क्या होता है। तुम्हारे भोगने कैसे चक्खर खा रये हैं, ज्यादा चमरका चोखा नीं होता बीनणी। अइयां खीजेगी तौ इस टापरै में तुम्हारी पार दोरी ई पड़ेगी

बीना – मां, भाभी नैं क्यूं धमकावै है, भाभी तौ भोत चोखी है। स्यान सकल की भोत सरूप है। पढ़्योड़ी, म्हारली क्लास का सारा पाठ जबानी याद पड़्या है। अंगरेजी तौ म्हारली भैणजी बी अइंया की कोनीं बोलै।

तारा - के पाछै अंगरेजणीं बणैगी, म्हानै के नौकरी कराणी है। घरां यो ई चोकै चुल्है को काम।

बीनणी – माताजी, जरा आराम कर लीजिए, मैं आपको बात कहना चाहती हूं। अपने घर में बिजली का कनैक्सन है, आप एक आध पंखा क्यों नहीं लगवा लेते?

तारा – गजब करैं है अें बीनणी। आयां अेक दिन कोनी होयौ अर हवाई झाझ की मांग कर बैठी। बावळी, उरै उम्मर गाळ दी, हाथ हाळौ बीजणौ ई कदै काम में कोनी लियौ। पंखौ लगा तौ ल्यां पण खरचौ आतां ई सरीर को पंखौ खड़्यौ हो ज्यागौ।

बीना – मां, भाभी कै कमरै में अेक पंखो जरूर लगा दे!

तारा – (हाथ नचाकै) मेरा बुलबलियै की जात छोरा तौ दुफेरी में पसीना में रोजीना न्हावै और या लुगाई की जात पंखौ लगावैगी। हे भगवान्! आछ्‌यौ कळजुग आयौ। (स्योप्रसाद धोती लपेट्यां अर गंजी पैरतौ-पैरतौ आवै है, बीनणी स्योप्रसाद नै पीठ देकै खड़ी होज्या है)

स्योप्रसाद – कोई ग्यान की बात होगी, सुण्या कर जैसै तेरा हिरदै का किंवाड़ खुलज्या, नई तौ अहिल्या की ज्यूं भाटौ ई बणी रैगी।

तारा – (बीनणी कानी इसारौ करकै) या टिटेरी मन्नै ग्यान सिखावैगी– म्हैं तानै अइयां ई लागू हूं के? या थारी बीनणी कैह री है कै तावळा पंखौ लगवाद्‌यो नीं तौ थाणै में पकड़वा देगी।

बीना – मां, कद कैह री है बिचापड़ी। भाभी तौ यूं बोली कै गरमी ज्यादा है जिकौ पंखौ लगवाल्यौ।

स्योप्रसाद – अैंमें के गाळ काड दी बीनणी, टाबर है, गरमी तौ लागै ही।

तारा – ओ हौ! गरमी लागै परी है। म्हे तौ अैंकै मान था सो चाकी पीस्या करता, पाणी भरकै ल्यावता। अेक गोदियां में रैतौ तौ अेक लैर्‌यां-लैर्‌यां लिवारियौ सौ गैल रैतौ। म्हे तौ कदेई ऊपरनै चांचरौ कोनी कर्‌यौ, इब अैंनै पावर हाउस चायै।

स्योप्रसाद – क्यूं करै है न्यूं, बो जमानौ और थो और यो जमानौ और! तूं कक्कौ कोनी सीखेड़ी, बीनणी अंगरेजी पढ़्योड़ी। तेरै ब्याव में रपिया लाग्या और बीनणी..

तारा – (हाथ नचाकै) थांरी तौ बुद्धि भिस्ट होरी है, न्यूं तौ कोनी आवळ-कावळ बोलै तौ टाबर नै धमकावै, उल्टा सिर पर चढावौ। मेरौ के लियौ आज या थानै चोखी लागै है, थोड़ा दिनां में देखलियौ या थारी बिन्दी नीं करदै तौ भलाई, के अैंकी हिन्दी पर मोदा होया फिरौ हौ।

स्योप्रसाद – आछ्यौ भई! तेरै टाबरां की ज्यूं राखैगी तौ तेरी सेवा करैगी, नीं तौ या चिटपिट जिन्दगी भर चालती रैगी।

(स्योप्रसाद चल्यौ जा है)

बीनणी – मांजी, मैं तो आपकी लड़की हूं, बीना में और मुझ में कोई अन्तर नहीं होना चाहिए। हमारा स्थान तो माता-पिता के चरणों में होना चाहिए।

तारा – चरण में होना चाहिए। टांग पकड़ कै खींचण खातर नै तेरै बरकी भोत चराई है। मन्नै के उपदेस दै हैं, तेरै बाप नै दे।

बीनणी – आप मेरे पिताजी का नाम क्यों लगाते है, उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा है।

बीना – मां तूं काम कर, म्हे अर भाभी पढ़ाई की बात करांगा तूं कासण मांज ले।

तारा – ओ हो! कासण क्यूं मांजू, या मांज लेगी, मेरे सै माथा मारै, मारकै कछड़ियौ या तौ खड़ी होगी और में नोकराणी की ज्यूं कासण मांज-मांज के भलाईं सारौ सरीर घस ल्यौ।

बीनणी – माताजी, आप खुश रहिए, बरतन मैं साफ कर लूंगी, मेरे हाथ घिसते थोड़े ही है। मेरी मां ने यही बताया कि अपनी सासू को मां के बराबर मानना।

तारा – मैं क्यूं हूं तेरी मां, तेरी सासूं हूं, सासू। मेरे मैं ऊरमा होगी तो मैं तेरै से काम लेल्यूंगी, नीं तो तू जाणै और घड़सी जाणै।

बीनणी – अपने लड़के का नाम तो ठीक बोलिए। मां बाप अपने बच्चे का नाम ठीक बोलेंगे तो गांव के लोग भी ठीक बोलेंगे।

तारा – के बोलूं? घड़स्यामदासजी कूं? आणै द्‌यो।

बीनणी – (हांसकै) यह मैं कब कहती हूं माताजी, आप नाम पूरा ले लीजिए, घनस्याम!

तारा – अे बीरा, तेरी जबान कै बास्तै लागियै अे, तेरै ब्या’एड़ै को नाम ले, सरम कोनी आवै तन्नै। हे मेरा रामजी, कळजुग आणै में कसर कोनी।

बीनणी – इसमें सरम की कोई बात नहीं माताजी, जिसको जीवन साथी चुन लिया उस पर प्राण भी न जाए थोड़ा है, नाम लेना तो मामूली बात है। आप ससुर जी का नाम नही लेते तो यह पुराना रिवाज है। नाम लेने से उमर बढती है।

तारा – बास्तै बढ़ती है। आपणै मोट्यार का नाम नीचली जात वाळा लेते हैं, म्हे ऊपरली जात हां, धरम करम का ग्यान आपनै होणा चाहिए। तुमने नाम लेकै अपणा थोबड़ा भिस्ट कर डाल्या– रामजी से डरणा चाहिये।

बीना – मां, फालतू अड़ंगौ कर दियौ आ’ कै– नाम ले दियौ तौ के होगौ।

(मामकोर आवै है – उमर में तारा की बरोबर, दूरा हाड पगां सरीर)

मामकोर – कैंको नाम ले दियौ भाणं? कइयां किरळै की ज्यूं रंग अर न्योळियै की ज्यूं पैंतरा बदळरी है।

तारा - आव, अे भाण – यो म्हारै नयौ भाटौ आयौ है’क– आपकै खसम को नाम ले दियौ– घनस्याम!

मामकोर – काम तौ चोखौ कोनी कर्‌यौ– पण के अफसोस भाण! आजकाल की छोरियां कै कोई नेम धरम तौ है कोनी। चूल चाट्योड़ी नटणी की ज्यूं बाळ खिंडाया, उल्टौ पल्लौ ले’कै घूमण लागगी। सरम लाज तौ रही कोनी।

बीना – वा ओ काकी, तूं बी रेल कै इंजन की ज्यूं फक-फक ई करती आई। के अधरम की बात होगी, काकी, जो बात निकळगी बा निकळगी...

मामकोर – क्यूं निकळगी, पढ़गी तौ अैंकौ मतलब यो तौ कोनी के आपकै ब्या’अेड़ै का नाम लेती फिरै– अे बीरा, छोरी बी तेरी भाभी की हां में हां मिलाण लागगी।

तारा – क्यूं कोनी मिलावै बापड़ी, काम करै कोनी अर इस्कूल कै मिस या बी कोई काम को टोलौ कोनी मारै। काम बेई कैहवां तौ इसकूल कै काम को मिस ले दे। अैंकी पढ़ाई छुटवा दूंगी जद अैंकी अकल ठिकाणै आवैगी। तूं बी तेरै ब्या’अेड़ै को नाम लेगी के?

बीना – मां! क्यूं बात को बतंगड़ बणावै, नाम सै इतणौ नई चिढ़णौ चाये।

मामकोर – आपणै बास में संतू की भू है नै, बा आपकै जेठ को नाम मरी जठै ताणी कोनी लियौ। जेठ को नाम ताराचंद है। अेक बार तारौ लागर्‌यौ हौ तौ राम की पूरी याई बोली आपकी सासू नै कै, सासूजी! जेठजी को नाम कद डूबैगौ।

बीनणी – (स्वागत) हे भगवान्, बुरे फंसे। हमारे समाज में, खास कर महिलाओं में इतनी पुरानी रूढ़ियां घर कर गई है। कि उसका कोई उपाय नहीं। (प्रगट) अच्छा माताजी! माफ किजिएगा, मुझ से भंयकर भूल हो गई, आगे से नाम नहीं लूंगी।

तारा – नाम ले तौ रामजी को लिया कर दिखां, सो भलौ दीखै– पण तेरै रामजी के मांगै, तूं तौ अंगरेजी पढ़्योड़ी है। निमटै पैल्यां तौ चा पीले है और के करू होरी है।

बीनणी – यह तो बेड टी की आदत है माताजी छूटती ही नहीं, प्रयत्न करूंगी, शायद छूट जाए।

मामकोर – भाण! बीनणी बोलै तौ है कोयल बरकी, जबान में जाणी मिसरी घोळ राखी है। न्ह्याल होगी भायली।

तारा – न्ह्याल क्यांकी, मेरा तौ अड़के ई फूटगा। या इसी गिटपिट बोलै है कै म्हनै तौ भोत बुरी लागै है।

बीनणी – इसमें माताजी मैं विवश हूं। मेरे घर में सब हिन्दी बोलते हैं, मुझे मारवाड़ी बोलनी नहीं आती। मैं मारवाड़ी समझ तो जाती हूं पर मुझ से बोली नहीं जाती।

मामकोर – सीख ज्यागी अे धीरै-धीरै, म्हारली भाण तन्नै ठोलां नीचै राखैगी तौ तूं तौ के तेरा सारा घर का सीख ज्यागा। मारवाड़ी भोत सोरी है बीनणी।

बीनणी – यह मैं कब कहती हूं। आई एम वेरी सोरी, कि मुझे, आई मीन, मारवाड़ी
नहीं आती।

तारा – देख लिया न तिंदर मामकोर, या थोड़ी-थोड़ी देर से मेरै सै टिचकली करै है। दो दिन होगा अैनै आयां, मेरौ तौ सारौ लो'ई पीगी।

मामकोर – चालू हूं भाण में तौ तेरली बीनणी तौ बीरा अंगरेजी का टूक उढावै है। या तौ अंगरेजी में ही खांसै है अर अंगरेजी में ई खीजै है। (मामकोर चली जा है।)

तारा – इब या मामकोर सारै बास में रोळा करैगी, (झाळ मारकै) या मेरी कुण क्हई मानै कोनी नै, ओळ-पंचोळ बोलै, अैंकी मां रांड अै ई पंचोळ सिखाया, कोई आछी। बात तौ सिखाई कोनी।

बीनणी – (बिदक’कै) आप मेरी मां को गाळी क्यों निकालती हैं, उन्होंने आपका क्या बिगाड़ा है। कोई आपकी माताजी को गालियां दे तो आप उसे सहन करलेंगी क्या?

तारा – (हाथ पटक-पटककै) इब काडरी है नै तूं – मिसामिस जबान खींच ल्यूंगी रांड की, के कतरणी सी जबान चलावै है।

बीना – मां रैण दे (अेक कानी करै है) बात मनां बढ़ावै!

बीनणी – माताजी, आपको थोड़ा सोचना चाहिए, मैं तो आपकी लड़की हूं। मुझे गालियां देंगी तो आप स्वयं को ही देंगी। सन्तान को दी गई गालियां स्वयं मां बाप पर ही पड़ती है।

तारा – तूं गाळां काडै है जरखणी, तेरौ पकड़कै झूंड इसी घीसूंगी कै तूं याद राखैगी– आवण दे घड़सियै नै, जे तेरी सालां नै घलवाई तौ मेरौ नाम नहीं।

बीनणी – माताजी आप क्रोध मत किजीए, मुझे भी क्रोध आ जायेगा।

तारा – तेरै कूं आ जायेगा तौ क्या जै कर देगी। तूं काल की जायोड़ी टींगरी म्हारै मूंडै लगती है। तुम्हारी जबाड़ी खींच ली जाएगी।

बीनणी – मैं तो बार-बार क्षमायाचना कर रही हूं और आप मेरे पर बेमतलब गुस्सा कर रही है। अब माताजी, सहन के बाहर है। मैं भी आखिर मिट्टी की नहीं हूं।
(घनस्याम को प्रवेस, हाथ में दांतां को टूथपेस्ट और ब्रस है, दोनुआं को युद्ध देख के हक्कौ-बक्कौ होज्या है। कदै मां कानी और कदै बीनणी कानी, बारी-बारी सूं देखै है। मां कनै जाकै–)

घनस्याम – के बात है मां?

तारा – (सुबकियां चढकै) रे भाया! मैं तेरी बनड़ी नै पूछ (आंसू ल्याकै) रै मन्नै ये दिन देखणा था रै तन्नै पाळ्यौ पोस्यौ में आलै में सोई तन्नै सूक्कै में सुवायो रै बारै मेरी या ई दुरगति होणी थी।

घनस्याम – (घबराकै) किमी क्हगी के पहेली बुझाती रहवैगी साफ-साफ बता, के बात
होयी, काकोजी किमी कह्यो के?

तारा – (रो कै) रै तेरी बीनणी मेरै छाती में घाव कर दियौ– गाळ काडी और (जोर सैं रो के) मारण चाली, मेरी सौंकण।

बीना – नहीं भाईजी, भाभी को..

घनस्याम – (बीच में) चुप रह, तन्नै पंचायती की जरूरत कोनी (बीनणी कानी मूं करकै) के बात है?

बीनणी – (सरमाकै) कुछ नहीं।

घनस्याम – फेर, मां क्यूं रोती है?

बीनणी – मुझे क्या पता!

घनस्याम – तुम को नहीं पता तो क्या फांफरनाथ को पता है। बाड़ां बारकै क्यूं चकर काटती हौ। सीदी बात क्यूं नई कैती!

तारा – रै या के क्हगी, चिरत करण वाळी अेक लम्बर है। तन्नै हाथ देगी रै घड़सा– तेरै सैं ज्यादा पढ़्योड़ी है।

घनस्याम – (झाळ मारकै) पाछै के बेद व्यासणी है। मेरी मां नै जो ख्यारैगी, में बदळो ले’कै छोडूंगा। परसराम की ज्यूं में नाड़ काट के परै बगा दूंगा।

बीनणी – बिना कसूर कै आप क्या कर सकते हैं। पहले मेरी बात तो सुन लिजिए। याह्या खां की तरह मिलिट्री रूल मत लागू कीजिए।

घनस्याम – (बीनणी कै कान कन्नै मुंह लेज्याकै, कुछ कहवै है और झाळ में आकै) में कुछ नहीं सुणणा चाहता, मेरी मां को बिना मतलब ख्यारनै का बदळा लेकै छोडूंगा। (हाथ पकड़कै) (बीनणी नै घींसण लागज्या है।) माताजी, बचाइए, मुझे मारने ले जा रहे हैं। माताजी बचाइए, मुझे मारने ले जा रहे हैं। माताजी बचाइए, (बीनणी जोर से बोलती-बोलती घनस्याम कै लैर्‌यां घसीटती चली जा है।)

बीना – मां, भायौ गुस्सै में है, कठै फिरतै काळजै पर लागज्यागी, तो बड़ी मुस्कल होज्यागी।

तारा – (घबराकै) मन्नै के बेरौ थो घनस्याम इतणौ क्रोध करैगौ में तौ सोची आजकाल का छोरा आप-आप की बीनणियां कै नाड़ै बंध्या डोलै है, औरत का गुलाम होवै है, मां बाप की के ग्यान-गिणती राखै पण घनस्याम तौ आछी मर्दमी करी।

(पीछे सै घनस्याम की जोर से आवाज– ओजूं करैगी– ओजूं करैगी बीनणी की आवाज– उई अम्माजी, मेरी जान निकाळ कर छोड़ेगें। बचाओ, बचाओ की आवाज आवै है)

तारा – (इनै-उन्नै हांडकै) रै तौ इब ज्यान ही काडैगौ के – छोड दे, ओजूं कोनी करैगी।

घनस्याम की आवाज – ओजूं हिन्दी छांटेगी, मां, आगै– बोल (मार की आवाज) बोल।

बीनणी की आवाज – अजी नहीं (रो कै) छोड़ दीजिए – ओह माताजी, मार डालारे

तारा - रै रामारया छोड दै रे, मेरी बुलबुलियै सी बीनणी की ज्यान काड के ई छोडैगौ के– रै अधरमी, अन्याई, छोड़ दे, में गिटपिट सुणल्यूंगी।

घनस्याम की आवाज – नहीं पाछै तूं ओजूं सिकायत करैगी – में आज ही निस्तारौ
करके छोडूंगौ– बोल-बोल–

तारा – जाण दे (भाग के घर कै भीतर चली जावै है, बीना उदास सी खड़ी होज्या है, कदै इन्नै जा है अर कदै उन्नै जा है– थोड़ी देर तारा सुबकती बीनणी नै बारनै लियावै है।)

तारा – (पुचकारकै) मेरी बुलबुलियौ सी बीनणी नै कुण मारी बस– चुप ओ मेरी स्योनचिड़ी, चुप होज्या...।

बीनणी – मांजी फिर में आपकै मुंह नहीं लगूंगी, आज तो आपने बचा दिया नहीं तो मुझे मार ही डालतै।

तारा – मारणियै का कूणियां कन्नै सै तोड़ दूं, के समझ राखी है, (पुचकारकै) के सुन्नी समझ राखी है मेरी टोरड़ी नै! पुच.. बस रोवै मतनां। (घनस्याम आवै है अर थोड़ौ सो मुळकन लागै है।)

बीना – भाईजी, चोखी बात कोनी करी– भाभीजी बिचारी गऊ है अणानै...

तारा – रैण दे (घनस्याम कानी देखकै) हांसै है रामारयौ पारदी। मेरी काळजै की स्योनचिड़ी नै मारण चाल्यौ, ओजूं अैं कानी चाल्यौ तौ गोडा तोड़ दूंगी।

घनस्याम – तूं ई कै’री थी मां कै या मनै गाळ काडै है अर मन्नै मारण चालै है।

तारा – या के मारैगी, मेरी ई बुद्धि कै ताळौ लागर्‌यौ हौ, आज खुलैगौ–

(स्योप्रसाद छातौ लियां आवै है, बीनणी नाक ताणीं घुंघटौ खींच कै अेक कानी खड़ी होज्या है)

स्योप्रसाद – चाबी ल्हादगी के घनस्याम की मां! चोखौ होयौ नहीं तौ ताळौ तुड़वाणौ पड़तौ।

तारा – के, मेरौ खोपड़ौ तोड़ता, में तो बुद्धि की बात करती थी, थानै किमि ऊँचौ सुणन लागगौ दीखै आजकाल।

स्योप्रसाद – घनस्याम, अेक छात पर लगावण को पंखौ अर अेक टेबल को पंखौ। लियायै, गरमी पड़ण लागगी, अर आज बीनणी बी कै’री थी।

घनस्याम – (तारा कानी देखकै) क्यूं मां, तेरै के जचै?

तारा – मेरै के जचै है, गरमी तौ पड़ै ई है, लागज्या तौ ठीक ई है। बीनणी बी टाबर है। अैंकी मनकी बी निकळ ज्यागी (बीनणी कानी देखकै) स्याणा साची कही है कै मां बाप नै आखर टाबर आगै हार मानणी पड़ै है– (बीनणी कानी मुळकती चली जा है)

स्योप्रसाद – आज तौ देवी मण्ड में है, घनस्याम नई तौ दो घंटा सै हाय तोबा मचा राखी है। के जादू कर दियौ– चाणचकै ई अेक दम गऊ होगी।

बीना – बापू! घनस्याम भाभी कै मारी।

घनस्याम – तैं भाग ज्या बेबी नहीं तौ तेरी बी खैर सल्ला नहीं।
(बीना कानी चालै है, बीना हांस के भागज्या है)

स्योप्रसाद – म्हैं तौ दुकान जार्‌यो हूं, यो काम आज ई कर दियै घनस्याम।

घनस्याम – आछ्यौ बापू!
(स्योप्रसाद छातौ ताणकै बारनै चल्यौ जा है)

बीनणी – (हांसकै) आज तो अच्छा ड्रामा किया आपने। माताजी का दिल मोम की तरह है। आपकी स्कीम अच्छी रही नहीं तो मेरे बस का रोग नहीं था।

घनस्याम – (किवाड़ उढ़ाळ कै– बीनणी कन्नै आके) अै नाटिक तुम्हारे खातर कर्‌या, नहीं तौ मां का विकराळ रूप देखके मुझे तौ तिवांळा सा आणै लग गया था।

बीनणी – आप हिन्दी क्यों बोलते हैं, मारवाड़ी बोलिए न– मुझे मारवाड़ी बड़ी प्यारी लगती है।

घनस्याम – (कन्नै सी आकै) तुम हिन्दी ई बोलणा, तुम्हारी बोली गरगुन्डै कै रस स्यारखी लगती है अर हिन्दी हमकूं ज्यान से भी आछी लगती है। यह बात मैं धरम से कहता हूं।

बीनणी – (दूर हटकै) रहने दीजिए– आप बातें बनाते है– किसी और को भुलावा दीजिए।

घनस्याम – ब्या तौ तुम्हारे सै हुया है और किस कूं भुळावै, कोई नेड़ै ई नहीं आणे देता। हमारा तुम्हारे आगे ई हियाव बगता है।

बीनणी – अच्छा तो मैं बी आज सै मारवाड़ी सीखूंगी अर मां जी की सेवा करूंगी।

घनस्याम – फेर तौ सुरग बेगा ई हमारै कन्नै आज्यावैगा, मां का काळजा बी दब्या रह ज्यागा अर आपणी जोड़ी ईसर और गणगौर की ज्यूं अमर होज्यावैगी।

बीनणी – भगवान ने हमारी जोड़ी खूब बणाई –

घनस्याम – 
धन-धन म्हारो भाग है, आया म्हारै लार।
मिनख जुमारौ सुफल है, यो जीवण रौ सार॥
म्हे था मोथा बावळा, ज्यूं जंगल का रूख।
थे हौ, सागै दायजौ, ल्याया सात्यूं सुख ॥

बीनणी –
दर्शन करके आपका, हम हैं राजी आज।
आप हमारी राग हो, हम बन जाएं साज॥
सास हमारी सरस्वती, ससुर मिले भगवान।
ननद सुरीली बांसुरी, ज्यों सातों पकवान॥

घनस्याम – 
हिन्दी तो भासा भली, पण मायड़ रा बोल।
राजस्थानी गाजसी, पड़दा देसी खोल॥
थे सीखौ– धन भाग है, मायड़ भासा बोल।
नाचां कूदां मौज मन, खूब घुरावां ढोल॥

बीनणी –
अच्छा-अच्छा सुन लिया, यह है राजस्थान।
बोल यहां के मधुर है, इसके आप प्रमाण॥
हम सीखें यह बोल भी, राजस्थानी ज्ञान।
‘हम काळजिया कोर’ है, आप हमारे प्राण॥

(घनस्याम बीनणी कानी चालै है अर बिनणी किंवाड़ खोलके बारनै भागज्या है। धीरै-धीरै पड़दौ गिरज्या है।)
स्रोत
  • पोथी : राजस्थानी एकांकी ,
  • सिरजक : नागराज शर्मा ,
  • संपादक : गणपति चन्द्र भण्डारी ,
  • प्रकाशक : अरिहन्त प्रकाशन, जोधपुर ,
  • संस्करण : चतुर्थ
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