पात्र
बखतावरजी – गांव रा नेता
रामू , गोपू , सीतल, खीमौ, भैरू, ईदू – गांव रा लोग
गबरू – नसैबाज
(गांव रा दूजा मिनख नै तीन डोकरियां, मा'राज बगैरा)
पैलौ-दरसाव
(परभात री टैम। गांव री अेक टूटोड़ी चांतरी माथै बैठी बूढ़ी डोकरियां। बीच में मा’राज बैठा कथा वार्ता करै। कथा वार्ता खत्म हुवण पर चरणाम्रत तुलसी दळ ले नै आपस में बातां करती जावै। सैंगारै गळै में माळा पैर्योड़ी नै लिलाड़ माथै चंदण री टीकी लागोड़ी है। पुराणै ढंग री छींटां रा घाघरा, रंगीन जाडा ओरणां नै अंगरखियां पैर्योड़ी है।)
अेक डोकरी – मा’राज! सुगन लौ नी देखांण? रामू रौ छोरौ कद तक लाद जासी।
मा'राज – (आंखियां मीच’र) मिळ तौ जावणौ चहिजै सुगनाऊं तौ अे’काध दिन में ई। देखौ।
डोकरी – आपरी जीभ नै इमरत मा’राज! लाद जा, तौ संकट मिटै बिचारां रै घर रौ। (दूजी लुगायां रै सामैं देख’र) देखौ! बापड़ां में कैड़ी हुई? तीन दिन हुवा लायां री रांदी हांड्यां पड़ी रैगी।
तीजी डोकरी – दो दाड़ा हुआ बिचारां रै पगां में पाणी पड़ग्यौ है, घूमतां-घूमतां। आज तक तौ डावड़ा रौ पतौ को लागौ नीं।
(मा’राज बस्तौ बांध नै चढापौ ले नै रवाना हुवै। डोकरियां आपस में बातां करती रैवै।)
चौथी डोकरी – परभू गयौ सुणियो बखताराम जी रै कनै। वै कैयौ कै पुळस में रिपोट दौ उणरी! सांई रा सौ खेल। कंईं ठीक कंईं हुवौ?
तीजी डोकरी – यूं भी मोटा आदमियां री बातां तौ मान भी लेवणी चहिजै। बखतारामजी आपणै गांव रा 5 हजार घरां में समझदार है। कैवै सौ ठीक ई है। सांई रा सौ खेल। कंईं ठीक कंईं हुवौ?
पैली डोकरी – मोटा आदमियां री मोटी बात हुवै बै’ना! बोलौ, गांव पूरौ पगां माथै हुयगौ पण बखताराम जी कंईं ठा’ किसी साळ में जाय नै लुकग्या।
दूजी डोकरी – साची बात है। अेक वार बोट लेवण नै आया जिणरै पाछौ तौ मूंडौ ई को बतायौ नीं। गांववाळा अगर वांरै कनै कोई काम सारू जावै तौ कोई कानूनी पेच बताय नै वांनै टरकाय दै।
(अेक आदमी दौड़तौ चांतरा कनै आवै नै हांपतौ हांपतौ बोलै)
आदमी – मां!
डोकरी – हां, बेटा गोपू! खोज लागौ रे बेटा रामू रै छो’रा रौ?
गोपू – हां, मां! गफूरियौ बात करतौ हौ कै रामू रौ छोरौ न्हावण नै बागर बावड़ी माथै गयौ हौ अर न्हावतौ-न्हावतौ पाणी में छिपगौ।
डोकरी – बेटा, गफूरिया नै पूरी बातां तौ पूछी हुती रे।
गोपू – पांच बरस रौ तौ छोरै है मां, जादा बता भी नहीं सकै। पतौ भी नहीं पड़ियौ कै उठै कुण कुण हा। कारण, पुळस्यां रै डर सूं सारा चुप है मां!
दूजी डोकरी – साची बात है आ’।
गोपू – हां जरूर वो पाणी में डूबियौ है। निगै करणी चहिजै।
डोकरी – बेटा, रामू नै या उणरी मां नै तौ उणरी खबर दी होती जिण सूं वे’ तौ बापड़ा ऊंधा गोता नहीं खावै।
गोपू – मां! आ’ बात वांनै म्हैं कीकर कैऊं कै थांरौ बेटौ बावड़ी में डूब’र मरगौ जद कै हालतक पूरी उणरी तसल्ली भी नहीं हुयी।
डोकरी – (कीं गुस्सै में) जाय नै म्हैं कै'ऊं, थूं नही कैवै तौ। थूं जा बावड़ी कानीं। उण रै खोज रौ पतौ लगा। (पैली डोकरी ऊठनै जावै)
दूजौ-दरसाव
(रामू रौ टूटोड़ौ झूंपौ। रामू रौ मूंडौ उतरियोड़ौ। नीचौ मूंडौ कीयां आंसूड़ा ढळकावै है। हाथां माथै माथौ टेकनै मां उदास बैठी है। रामू री लुगावड़ी खूणा में अेकण कानीं बैठी है घूंघटौ काढ्योड़ी। सारा ई चुपचाप बैठा है। पैली डोकरी जायनै रामू री मां रै कनै बैठै। रामू री मां डोकरी रै पगां लागै नै डोकरी आसीस देवै।)
गोपू री मां – पतौ लागौ अे बीनणी?
रामू री मां – नहीं भाभी जी! हाल तौ कीं ठा’ पड़ी कोनीं। आप ई राय दौ। अबै कंईं करणौ चहिजै?
गोपू री मां – बाई, बेरा बावड़ी भी सोध लेवणा चहिजै। कंईं ठा’ डावड़ौ गयौ है उठीनै, नै पग उजक ग्यौ व्है।
रामू री मां – अेक बावड़ी बेरौ व्है तौ जोवां भोळा भाभी जी! इतरा बडा गांव में सारा बेरा बावड़ी छाण मेलणा कोई सै’ल बात कोनीं।
गोपू री मां – हमारूं टाबरां मांय सूं अैड़ी बात आई है कै बागर बावड़ी कांनी जावतां उणनै टाबर देखियौ हौ (रामू री मां में थोड़ी चंचलता वापरै)।
रामू री मां – बई भाभीजी, हमार मेलां किणनै ई, आप कैयौ है तौ। (थोड़ी रुकनै) तीन दिनां में तौ पाणी में डूबोड़ी ल्हास भी ऊपर आ जावै।
गोपू री मां – कीं ठा’ को पड़ै नीं। पैली हुकमा रौ बूढौ बाप सात दिनां सूं बारै आयौ। वो भी अेक छोरौ पाणी में गंठौ लगायौ जद उण डोकरा री ल्हास नै वो छोरौ दोनूं ई अेक साथै पाणी रै बारै निकळिया। छोरौ तौ अेड़ौ गिगीजियौ कै छै महीना तांई उणनै ताव को छोडियौ नीं डर सूं। पछै केई बैद भोपा बुलाया जरैं कठैई छै महीना सूं जायनै सुधरण लागौ।
रामू री मां – (तेज बोली में) रामू! ओ रामू! सुण अै, भाभीसा कांई कैवै है। बेटा, उण रौ पतौ तौ लगावौ।
गोपू री मां – हां बेटा रामू! थांरौ भाई तौ गयौ ईज है। थे भी जावौ। बागर बावड़ी माथै उणरौ पतौ लगावौ दोनूं भाई मिळ’र। सायद खोज लाग जावै।
रामू – औ’ जाऊं मां
(पड़दौ पड़ै)
तीजौ-दरसाव
(बखता रामजी रौ बंगळौ। कमरा में बखतारामजी टैल रैया है। अेकण कानीं अेक खूंटी पर सफेद झक चोळौ नै धोतियौ लटकै है नै अेक मेज माथै खादी री धोळी टोपी उस्तरी कियोड़ी पड़ी है। सामनै भींत मांथै गांधीजी नै नैहरूजी री तस्बीरां लटक रैयी है। कमरा में अेक सोफा सैट, दो आराम कुर्सियां नै अेक मेज ढंग सूं सजियोड़ी है। अेकण कानीं टैलीफोन पड़्यौ है। सीतळ नै देखनै आघा सूं हंसनै बोलै।)
बखता – आव सीतळ, कीकर आयौ?
सीतळ – थूं ही आयगौ अठीनै।
बखता – तौई, कीं तौ बात व्हैला।
सीतळ – बाबूजी, सुणी है कै रामू रौ बेटौ...।
बखता – हां, उणरौ पतौ लागौ रे?
सीतळ – पतौ तौ को लागौ नीं हाल, पण सुणीजै है कै वो बागर बावड़ी में पड़नै मर ग्यौ।
बखता – हैं..! आ’ कीकर हुई है?
सीतळ – रामू नै गांव रा निरा दूजा जणा बागर बावड़ी कानीं गया है नै गोपियौ कैवतौ हौ कै छोरा रा खोज जावतां रा तौ मिळै पण पाछा आवता रा को निजरीजै नीं।
बखता – नींगै तौ करनै आ पूरी। सांची बात कई है। (बणावटी उदासी दिखा’र) भ्हौत भूंडी हुई रै बापड़ा में! राम री इच्छा भई!
(यूं कै’र सीतळ बावड़ी कानी रवानै हुवै, बखतारामजी टैलीफोन उठावै नै बात करै।)
बखता – हेलौ बखताराम हां। सुपरडेन्ट साब? जै हिन्द! सुणी है कै गांव में रामू रौ छोरौ बागर बावड़ी में.. हेलो.. हां तीन दिन पैली हेलौ डूब नै मर ग्यौ। हां.. हेलौ.. बागर बावड़ी हेलौ.. आप आदमी भेज दौ। हां..हां.. अगर बात साची है तौ कीं तौ फायदौ ईज है। हां.. हेलौ पछै आप भी पधार जाईजौ। हां, हां, म्हैं भी आजाऊंला सिपारस करण नै। हेलौ.. हां सब निवड़ लूंला, म्हैं आऊंला जरैं हां.. ठीक है.. हेलौ इण सूं म्हारी पैठ तौ जमैलाई की हातै भी आवैला। हेलौ, हां बस ठीक है। फेर रूबरू मिळांलाई, धन्यवाद।
(टेलीफोन धरनै पाछा टै’लण लागै। दो आदमी आवै।)
खेमौ – (राम-राम करनै) बाबूजी! अैड़ौ सक है कै रामू रौ बेटौ बावड़ी में पड़नै मरियौ है। बापड़ौ तीन-तीन दिनां सूं उण छोरा रै फिकर में भूखौ तिरसौ दोड़ रैयौ है। घणोई समजायौ पण मानै ईज कोनी। होवणौ भी चहिजै, बेटा रौ फिकर जो है।
बखता – (नकली चैहरौ बणा’र) हां, भाई! बेटा रौ मौह अैड़ोईज है। पण आ’ तौ बतावौ कै बावड़ी में पड़नै मरण री नौबत कीकर आई। सुणियौ है कै मां नै बेटौ ब्याव रा मामला नै ले नै लड़ पड़िया हा?
भैरू – म्हैं तौ सुणियौ कोनीं बाबूजी नै अबार पूछण री बिळिया भी कोनी। बापड़ा रौ मूंडौ तौ लोही सूं भरीजियोड़ौ है।
बखता – पुळस रा आदमी तौ उठै नहीं आया कै?
खीमो – म्हैं तौ नहीं देखिया सा।
बखता – पुळस नै ठा’ पड़गी तौ अै ठरड़ीजता भूंडा लागैला।
भैरू – आप बिराजिया हौ जित्तै तौ कंईं चिन्ता है।
बखता – म्हैं कंई कर सकूंला भाई? कानून तौ सारां रै वास्तै अेक सरीखौ ईज है। खैर पण आ’ तौ बतावौ थे आया कीकर हौ?
खीमो – बाबूजी! म्हैं बावड़ी पर सूं आया हां, आपनै विनती करणनै। आप मैहरबानी करनै आपरै कंवर सा’ब नै भेज दिरावौ। वै तिरणौ चोखौ जाणै। भ्हौत हुंसियार है। वै चालै तौ छोरा रौ पतौ लगा सकै। तिरण रौ दूजौ समान भी साथै लेयनै चालै परा। म्हे भी मदद करांला।
बखता – भाई, आ कीकर हू सकै? रामू तौ आपरा छोरा नै गमायौ नै म्हैं भी उणरै दायजै में म्हारा छोरा नै गमाऊं?
भैरू – नहीं बाबूजी! आपरा बेटा रै हाथ सूं अर उण बापड़ा रौ मरियोड़ौ बेटौ भी निकळ जावै तौ उणरौ जीव तौ ठंडौ हो जावै। बापड़ौ डबडबाई आंखियां सूं आपरा, मरियोड़ा छोरा नै ई देखलै ई।
बखता – नहीं, भाई, नहीं, म्हैं तौ म्हारै छौरा नै आज भेजूं नै कालै। छोरो ई तौ है। डर जावै तौ गैलौ बावळौ व्है जावै। (थोड़ौ सोच नै) आप जायनै पठाण नै क्यूं नीं ले आवौ? वो तिरण रौ उस्ताद है। काम कर दैला।
भैरू – बाबूजी! आप गांव रा मुखिया हौ, नेता हौ, नै सब कुछ हौ। आपरै ई सारा सूं गांव रौ काम चालै है। अगर आप भी इमदाद को करौ नीं तौ ईदू बापड़जौ कई कर सकै है?
बखता – नहीं, उण रौ तौ काम ईज औ’ है भाई। थोड़ा-सा पइसा लेलेसी और कंईं? आप जावौ जल्दी। म्हैं कैऊं हूं कै।
खीमौ – जासां तौ परा पण सागर गयोड़ाई तिरसा आ जावै तौ बापड़ा पोखर कंईं तिरस बुझाई। (दोनूं आदमी जावै)
(पड़दौ पड़ै)
चौथौ-दरसाव
(ईदू आपरै घर में मांचा माथै उघाड़ै डील बैठौ है। अेक अंगोछौ लपेटियोड़ौ है। खीमौ नै भैरू आवै।)
दोनूं – ईदू भाई, सिलाम।
ईदू – सिलाम भाई खीमजी। आवौ भेरजी बैठौ। कीकर आया?
खीमौ – ईदू भाई! सुणियौ व्हैला आप कै रामू रौ अेका-अेक डीकरौ बागर बावड़ी में डूब ग्यौ बतावै। हाल तक वो निकळियो कोनी। बखतूजी कैयौ कै ईदू ने लेजायनै निकळवा लौ।
ईदू – भाई, हमार तौ म्हारै घर में भी कोई कोनी नै टाबर भी अेकला है। यां नै कीकर छोड़ दूं?
भैरू – आप हुकम दो तौ घर री नीगै तौ म्हैं राख लूंला। बिचारा गरीब रौ काम निकाळ दो तौ भगवान भलौ करैला। भलाई रौ काम है औ’तौ।
ईदू – काड तौ दूं भाई, पण हमार तौ म्हारी तबियत भी ठीक कोनीं नै फेर थे तौ जाणौई हो कै म्हैं तौ निकळाई रा पांच सौ रिपिया लूं हूं।
खीमौ – ईदू भाई! आपतौ जाणौ ईज हौ कै उण गरीब रै कनै पांच सौ रिपिया कठै? उण रै कनै तौ पचास धैला ई कोनीं।
ईदू – जरै भई आपरी जान कुण जोखम में न्हाकै? म्हनै तौ टेम है कोनी, और किणीनै पकड़लौ।
खीमौ – और तौ हमैं कुण है भाई? हरी तौ गांव गयौ, परौ, अबै कुण ओ काम कर सकै?
ईदू – बखतूजी नै ईज कौ कनीं? वै किणी रौ इन्तजाम कर दैला। गांव रा मुखिया है।
भैरू – वां तिलां में भी कीं तेल म्हानै दीखियौ कोनी। खुद रा बेटा नै तौ वे भेजै नहीं। अठी उठी टिल्लावै।
(इत्तै में दारू पियोड़ौ गबरू काकड़ी खावतौ उठीनै निकळै)
गबरू – अबै सालै! जानता है म्हैं कौन हूं? कर सालै तेरे बाप को सलाम। नहीं तौ मेरा नाम गबरू है। याद रखना।
गबरू – जान निकाल लूंगा सालै की (तीनां कानी देखनै) क्या हो रहा है बेटा? (सारा डर सूं चुप रैवै)
गबरू – कहौ बेटौं! आज क्या कर रहै हौ।
खीमौ – (हिम्मत करनै) आज बागर बावड़ी में रामू रौ छोरौ डूबग्यौ जिण सूं।
गबरू – अच्छा! बावड़ी पर भीड़ यूं है। म्हैं..म्मैं..ईदू! जाऔ, निकालौ उसे। निकालता क्यों नहीं रे?
ईदू – मुझे बुखार है।
गबरू – हां बेटा! ठीक, तेरी अैसी की तैसी। म्हैं निकालूंगा। चलौ। यूं समझता है तैरना तू ही जानता है। म्हैं भी जानता हूं। म्है जाता हूं..म्हैं..जाता हूं। सा..ला कहता है..म्हैं बीमार हूं। ठहर बेटा! म्हैं अभी उसे निकाल कर तेरा घमंड चूर करता हूं।
पांचवौं-दरसाव
(बागर बावड़ी माथै निरा आदमी ऊभा है। गबरू रै आगै-आगै खीमौ नै भैरौ पाछा आवै।)
रामू – कंईं हुवौ? बखताजी रौ बेटौ आयौ?
भैरौ – आया घणाई! अै मोटा मिनख अपां गरीबां रै काम आया कदैई?
खीमौ – वै तौ साफ नटगा कै म्हें तौ म्हारा छोरा री जान खतरै में को न्हाकूं नीं।
रामू – जरैं पछै? (गबरू आवै)
खीमौ – जरैं कंईं? कोई वांर रै भरोसै ईज थोड़ाई बैठां हां। गबरू भाई आयौ है कैवै कै मैं काडूलां उणनै।
रामू – काडै नीं बीरा गबरू! थूं खुद गरीब है, गरीबां री पीड़ समझै।
गबरू- तुम इतने मिट्टी के पुतले खड़े हो, देख रहे हो। शरम आनी चाहिरे तुमको । हटो सा.. लो ! नहीं तो मारूंगा मैं तुम कौ। हटो। (कपड़ा उत्तारूं बावड़ी में जावै ।)
(थोड़ी देर बाद बावड़ी कानीं देख देख नै लोग बातां करै ।)
खीमौ- गबरू जबरौ आदमी है। यूं तौ फेल फितूर करतौ फिरै, पण बखत माथे आडौ आयगौ ।
भेरू- देखौ, तीन चिबकियां तौ लगा चुकौ है। हाल तौ कीं पतौ लागौ नीं।
रामू अरे, गबरू बलाई मांगै ! बलाई दो झट । (ओक आदमी बलाई लेनै बावड़ी में न्हाकै ।)
३ आदमी- जबरौ है माटौ गबरू देखौ, लकड़ी रा लट्ठा माथै बैठनै बलाई सूं साध रयौ है।
खीमौ- (बावड़ी में देखनै) हमकै बलाई अटकी दिखै ।
भैरू- हां, हमकै अटकी। हे वो लगाई चिबकी ।
साराजणा (बावड़ी में देखनै) निकळियौ ! निकळियौ ! (रामू बावड़ी में मांये कानीं भागै, दूजा भी जावै। थोड़ी दूर पछै गबरू आपरा हाथां में ल्हास लेनै आवै । साथै रामू रोवतौ रोवतौ आवै ।)
खीमौ मरग्यौ ?
भैरू- तीन दिन हुवा पड़यां नै । जीवतौ कठा सूं रै 'वै ?
३ आदमी- खैर भाई । पतौ तौ लाग्यौ। लाई रामू री चिंता तौ मिटी ।
रामू गबरू भाई ! यूं म्हारी लाज राखी। म्हारा भाग फूटोड़ा जिणरौ ठौ यूं ई कई करै ? (१० रिपिया उणरै सामां धरै ।) भाई औ दस रिपिया थारी हाजरी में
हाजर है। म्हें गरीब हूं ।
गबरू रामू ! म्हें अब नसा रै बस में नहीं हूं। मैं गिरस्त हूं। म्हारै भी बाळ बच्चा है। अगर थारौ बेटौ जीवतौ निकळियौ हुतौ जद तौ म्है मूंछ मरोड़ नै बधाई ले लेवतौ । पण अबै म्हें रिपिया लेवणा हराम समझें। औ रिपिया नहीं लोही रा किरचा है।
रामू नहीं भाई ! म्हें राजी खुसी देऊं हूं, आप ले लिरावौ ।
गब्बरू - रामू ! म्है मगतौ तौ हूं नहीं । न म्है जिनावर हूं। नसौ जरूर करू हूं, कारण म्हैं दुःखी हूं । दुख ने भूलण रौ ओक औईज रस्तौ म्हनै दिखियौ। पण म्हें मिनख हूं अर मिनखपणा रौ ईज म्हें काम कियौ है।
रामू - भाई ! यूं मिनख नहीं देवता है, म्हारै सारू तौ। बिना सा'रा वाळां नै बूं सा'रौ दियौ है, इण वास्तै यूं देवता है।
गबरू - रामू ! म्हें देवता नहीं, मिनख ईज हूं, जिणनै आ दुनिया गुंडौ बणा राखियौ है। पण जका धन रौ नै कुरसी रौ नसौ करै वै मिनखपणौ भूल जावै । इणीज वास्तै वे मिनखा सूं आधा आधा रै'वै।
(सब लोग ओक दूजा रै सामी देखै। केयां री तौ अंखियां आसूंड़ां सूं डबडबा जावै । रामू जोर जोर सूं रोवण लागै। जमीन माथै धचाक करती रौ बैठ जावै । कीं लोग उणरै कनै बैठनै उणनै समझावण लागै ।)
खीमौ वा रे, गबरू वा ! देखौ, रिपियां नै कैड़ी ठोकर मार दी ! इण गरीबी री हालत में उणरै वास्तै तौ ओ दस मो'रा ही। पण नहीं ।
भैरू- गबरू मिनख है, भलै ई कपड़ा फाटा ई होवौ नै रै वण नै भलै ई टूटौ झूपौ ई क्यूं नीं हुवौ । नै मिनख रै काम नीं आवै जका ढांढा है भलैई बंगळा में ई क्यूं नीं रैवै ।
सब - लो, रामू भाई ! चालौ घरै। हमें इण रै दाग रौ इन्तजाम करौ । उठौ, हीमत राखौं ।
(रामू ऊठै नै पड़दौ पड़ै)