पात्र
भोळाराम जी – लड़कै रौ बाप
नाथूराम जी – लड़की रौ बाप
डॉ. सुरेंदर – भोळाराम रौ बेटौ
चरण सखी – भोळाराम री घरवाळी
चितरलेखा – नाथूरामजी री बेटी
राधाकिसन जी – भोळारामजी रा साळा
(जानिया, मांडिया, रामरतनजी वगैरा)
पैलो-दरसाव
(भोळाराम जी रौ कमरौ। सुबै री नव बजियां री बखत)
भोळा – बरसात में ज्यूं सारा मींडका अेक ई राग अलापै ज्यूं सारा लोग ब्याव सगाई री बदियोड़ी रीतां री बुराई तौ दिल खोल नै करै पण ज्यूं ई बात माथै आय नै पड़ै कै झट म्हारा बेटा किरकांटियां जूं रंग बदळ नै सैंग अेक सूं अेक बदनै अैड़ा ब्याव नै अैड़ी सगायां करै जाणै उणरै घरां में सोना री खान हुवै ज्यूं। घर, गैणां भलैई बिक जावौ पण सगाई नै ब्याव तौ सांगोपांग हूणा चाहिजै। अै सैंग भटकियोड़ा भायां नै नवो रस्तौ नहीं दिखाय दूं तौ म्हारौ नांव नहीं।
(नाथूरामजी रौ आवणौ)
(नाथूरामजी कानीं देखनै) पधारौ, पधारौ नाथूराम सा, आज आप तकलीफ कीकर करी?
नाथू – तकलीफ? बाबा, आप आ कंईं कौ? म्हैं तौ आप रा दरसण करण नै आयौ हूं।
भोळा – म्हारा दरसण? क्यूं गंगस्यामजी, कुंजबिहारीजी रा मिंदर बीजा ऊठ ग्या कंईं?
नाथू – (हंस नै) भोळारामजी, म्है तौ म्हांऊ बडा होवै बांनै सैंगा नै दरसण रै लायक ईज समजूं नै किणरौ ई बेटौ इन्जीनियरी या डाक्टरी में पढ़तौ हूवै तौ म्हारै वास्तै तौ वै भी गंगस्यामीजी नै कुंजबिहारीजी ईज है।
भोळा – बाबा, आ खूब कही! जद तौ आपरी अरथमेटिक रै हिसाब सूं म्हैं भी गंगस्यामजी ईज हूं?
नाथू – इण में कंईं सक! आपरौ लड़कौ भी तौ अेम.बी.सी.अेस पढै है। म्हैं उणरी सगाई रै वास्तै आप सूं बात करण नै आयौ हूं।
भोळा – हूं, यूं कौ। म्हैं देखियौ आज नाथूरामजी खुदोखुद कीकर पधारिया। जद आ बात है।
नाथू – बस, आ इज बात है। फरमावौ, आप कंईं चावौ?
भोळा – आप म्हनै कोई बैंक रौ चैक देवण नै पधारिया हौ कंईं?
नाथू – नहीं, आ बात नहीं है। म्हैं तौ आपरी रा’य लेवण नै आयौ हूं।
भोळा – आपरी, बातचीत सूं तौ अैड़ौ मालूम हुवै कै आप म्हारै लड़का नै मोलावण नै आया हौ। जदै इज तौ आप कैवौ हौ कै कंईं चा’वौ?
नाथू – अरे! राम राम! भोळारामजी, आप सूं कंईं बात छानी है? म्हारौ घर घराणौ, म्हारी जायदाद, म्हारी इज्जत आबरू– आपसूं छानी है? पण यां बातां नै आजकल पछै कुण है?
भोळा – क्यूं? अैड़ी कंईं बात है? लोग आप जैड़ा री कदर नहीं करैला, जद किणरी करैला?
नाथू – लोग तौ आजकल पईसौ देखै पईसौ! पईसौ है तौ सगळा थोक है नीं तौ आप नै कोई कोनीं पूछै।
भोळा – चाहे भलैई लड़की कित्ती ई चोखी क्यूं नीं हूवौ।
नाथू – लड़की पढ़ी लिखी नै भलैई इन्दर री परी व्है ज्यूं हुवै तो ई कंईं हुवै? सवाल तौ औ कै उण रौ बाप सगाई में साईकल, सोना री बींटी, गरम सूट, रेडियोग्राम नै पांच सौ आदमियां रौ खाणौ कर नै मिलणियां में हजार दो हजार रिपिया खरच सकै नी?
भोळा – सगाई में इत्तौ खरच!
नाथू – हां, हां सगाई में इत्तौ खरच!
भोळा – सगाई में इत्तौ खरच कर देवैला जद पछै ब्याव में आकास रा तारा तोड़नै लाय नै देवैला कंईं सगां नै?
नाथू – आ’ तौ पछै आप ई सोचौ। न्यात में अेल.डी.सी. नै यू.डी.सी. रा कीड़ा मकोड़ा घणा है कै अफसरां रा टीड?
भोळा – अरै भई अफसर कित्ताक? आपां तौ सैंग आप केवौ ज्यूं अेल.डी.सी., यू.डी.सी. ईज हां।
नाथू – जद अै लोग अैड़ी ब्याव सगायां कर सकै?
भोळा – बिलकुल नहीं, हरगिज नहीं।
पण – पण तोई करै तौ सैंग अेक दूजां री नकलां है। चाहे भलैई। कित्तोई कर्जो क्यूं नीं हूवै।
भोळा – म्हैं आप नै कैऊं अै सैंग नकलां है जिण में कठैई नै ई अकलां नहीं है?
नाथू – औ रस्तौ सरग रौ है?
भोळा – म्हैं तौ करजा रौ मूंडौ बाळू। करजां सूं चिन्ता नै चिन्ता सूं चिता! क्यूं आ’ईज बात है कै नहीं?
नाथू – पण भोळारामजी आप जैड़ा भोळा न्यात में है कित्ताक?
भोळा – आप म्हारी बडायां तौ करौ मती नै अबै व्है जकी बात कौ परी जकौ म्हनै भी सूजणा पड़ै।
नाथू – भोळारामजी, म्हैं तौ साफ आदमी हूं नै बिना लूण मिरच लगायां म्हैं आप नै आ कैणी चा’वूं हूं। इण में आप री कंईं राय है?
भोळा – (कीं सोचनै) म्हारी राय?
नाथू – हां, आपरी राय?
भोळा – म्हारी राय आप जाणणी चावौ तौ आ’ ईज है जकी कै आपरी राय है।
नाथू – कंईं कौ! आप नै औ सगपण मंजूर है?
भोळा – बिलकुल मंजूर है, अेकदम मंजूर। आफरै जैड़ा घराणा तौ बडभागी हुवै उणानै ईज मिळै।
नाथू – औ तौ आपरौ बडा-पणौ है, बाकी म्हैं किण लायक हूं? आछौ, तौ सगाई तै?
भोळा – अबकै वो फाईनल रै इम्तियान दे नै आवै जद आप सगाई नै ब्याव साथै ईज कर दीजौ।
नाथू – पण..
भोळा – पण कंईं? और कीं बात आप कैवणी चावौ तौ फरमावौ कनी।
नाथू – म्हैं तौ आपनै आ’ बात..अच्छा, बाकी री बातां पछै तै कर लेवां।
भोळा – नाथूरामजी! पछै-पछै आपणै कीं राखणौ ईज नहीं। सारी बात रौ खुलासौ अबार ईज हुजावणौ चाहिजै। फरमावौ, आप कंईं कैवणी चावौ?
नाथू – म्हैं कंईं बोलूं, म्हनै तौ सरम आवै।
भोळा – हैं! सरम? आ’ खूब रैयी। आप सायद आ’ कैवणी चावौ हौ कै ब्याव सगाई आजकल रै बिगड़ियोड़ा तरीकां सूं की जावै या पैली वाळा सुधरियोड़ा तरीकां सूं? क्यूं आ’ईज बात है कै?
नाथू – म्हैं तौ कैऊं कै आप वाकई में देवता ईज हौ! लोगां रै मन री बात बिना कैयां ई आप जाण जावौ, पछै आप में नै देवता में कंईं फरक?
भोळा – तौ लौ, नाथूरामजी! सुणौ, नै कान खोलनै सुणौ। म्हैं वो आदमी हूं जिण रै घराणा सूं सारी न्यात वाकब है। म्हारै घर में ब्याव सादियां में और औसर-मौसर रै मौकै न्यातां हुई है नै अैड़ा-अैड़ा ब्याव हुवा है कै राजा मराजां रा भी कंई होवता हुवैला। पण अबै समौ बदळ ग्यौ हैंग-सैंग लोग करजा रै दळदळ में गळा तक फंस गया हैंग पईसौ लोगां कनै है नहीं नै म्हैं खुद आं रीत रिवाजां री वजै सूं फकीर हुयग्यौ हूं। म्हैं सोगन ले ली हूं कै म्हांऊं बण पड़ैला जठै तक म्हैं किनैई म्हारै जैड़ौ नहीं हुवण दूंला।
नाथू – धिन है आपरी बुद्धि नै!
भोळा – नाथूरामजी! बुद्धि-उद्धि कीं नहीं है, सीधी-सी बात है म्है तौ आ समझूं कै जका लोग जमाना रै साथै चालै वै तौ चस निकळै नै जका जमाना रै साथै नहीं चालै वै आगै भिस्ट मिळ जावै।
नाथू – आपरौ फरमावणौ देव-वाणी व्है ज्यूं लागै तौ जद औ ब्याव आप नै फागण में मंजूर?
भोळा – दो वार तौ म्हैं आपनै मंजूरी दे चुकौ हूं और अबै आप चावौ म्हैं म्हारी मंजूरी री चूड़ी भरायदूं जकौ आप जाय नै घर में नै सारी न्यात में सुणा दीजौ।
नाथू – आप तौ बुरौ मान गया।
भोळा – अरै वा! इण में बुरौ मानण री कंईं बात? दरअसल में आजकल बात आ व्हैगी है कै जठै तक सगाई रौ दस्तूर नहीं हू जावै उठै तक बेटी रै बाप रै छाती माथै हाथ इज रैवै, इण में आपरौ कसूर कोनीं।
नाथू – नहीं, नहीं आ’बात नहीं है, आप म्हनै गलत समझ ग्या। म्हनै आपरौ पूरौ भरोसौ है।
भोळा – जद आप हळकौ मन करनै खुसी-खुसी पधारौ। म्हैं जीवूंला जठै तक आपरौ साथ देऊंला।
नाथू – म्हैं तौ कैऊं आप जैड़ा सगा भगवान सैंगा नै दै। पण अेक म्हारी राय फेर है।
भोळा – वा’ कई?
नाथू – आप अगर ठीक समझावौ तौ घर में भी इण बात री राय ले लिरावौ। कंईं हरज है?
भोळा – (हंस नै) आप भी खूब हौ। इण में घर में कंईं पूछूं? आछौ घराणौ नै चोखी लड़की किनै नहीं सुवावै? आप बे फिकर रैवौ। म्हैं अेकलोई सैंग निवड़ लेऊं।
नाथू – जद म्हैं सीख करूं? आपरी बौत टैम ले ली म्हैं। जै माताजी री (जावै)
भोळा – जै माताजी री। कैड़ा सरमवाळा आदमी है? लेवण-देवण री बात रौ म्हनै ईज खुलासौ करणौ पड़ियौ। बेटी रौ बाप करै तौ बिचारौ कंईं करै? पईसौ लावै तौ लावै कठाऊं? घर-घर में बायां रा ठाट है। छोरौ अेक तौ बायां चार! छोरा दो, तौ बायां आठ! (सामौ देखनै) क्यूं कौ कनी सा? (मांयै कानो देखनै) अै लो, आप खुदोखुद इज पधार ग्या।
(भोळारामजी री बऊ आवै)
चरण – अै अबार कुण आया हा?
भोळा – आप म्हारी डायरी लेवण नै आया हौ कंईं?
चरण – डायरी फेर कंईं हुवै? पूछां कोनी कंईं? थांरौ तौ सुभाव आजकल और रौ और हूग्यौ है।
भोळा – किणरौ, म्हारौ सुभाव?
चरण – हां, हां, थांरौ। कीं बात पूछां तौ काटता ईज बोलौ।
भोळा – अरै! राम राम! क्यूं झूठ बोलौ? म्हैं किसी बात थांऊं छानी राखूं?
चरण – जद पछै बताऔ कनीं कै अबार कुण आया हा नै कंईं वास्तै?
भोळा – अै तौ नाथूराम जी हा?
चरण – किसा नाथूरामजी?
भोळा – आंपां गाळियां में गावां हां कै? जिका नाथूरामजी।
चरण – (हंस नै) मजाकड़ा तौ करौ मती, नै सांची बताऔ कै अै कंईं वास्तै आया हा?
भोळा – बता दूं? नाराज तौ नहीं होवौ?
चरण – बताऔ कनीं, इण में नाराजगी री कंईं बात? थे म्हनै साव ऊंदी-जाड़ौ ईज समजौ हौ कंईं?
भोळा – देखौ झगड़ा री बात थां सरू करी कै म्है? म्हैं थानै कद ऊंदी जाड़ौ कैयौ?
चरण – थां कौ’ नहीं तौ कंईं? समजौ तौ यूं इज हौ कै? वा बाबा, बात है जकी कौ’ कनी।
भोळा – अै नाथूरामजी सगाई रै वास्तै आया हा।
चरण – सगाई? किणरी सगाई?
भोळा – भोळाराम तौ म्हैं हूं, थां बिचैई इत्ता भोळा क्यूं बणौ? थांनै ठा’ कौनी?
चरण – ठीक। आंपणै डाक्टर ऊं सगाई री बात करण नै आया व्हैला।
भोळा – थां तौ अबार साव अणजाण इज बणाता हा नीं।
चरण – यूं पूरी बात कैयां बिना कंईं ठा’ पड़ै?
भोळा – अबै तौ आपरै समझ में आयगी?
चरण – थे कंईं कैयौ?
भोळा – म्हैं कंईं कैऊं?
चरण – तौ ई?
भोळा – नाथूरामजी कोई चोर डाकू तौ है नहीं, लुच्चा लफंगा है नहीं, घर में इणां री बऊ रै सिवा और कोई है नहीं, रस्तै आवणवाळा नै रस्तै जावणवाळा है, जका सैंग जाणै। घर घराणौ चोखौ, लड़की पढी लिखी, बी.अे. पास, घर-घर रौ, लिछमीजी री पूरी किरपा पछै म्हैं कईं पूछू? म्हैं तौ वांनै कै दियौ आप जैड़ा सगा तौ बडभागी व्है जकां नै ईज मिळै।
चरण – जद थे म्हनै बिना पूछियांई सगाई तै कर दी!
भोळा – अरै भई, पूछण रौ सवाल तौ जद पड़ै कै उणां में या लड़की में कीं कसर व्है। अठै तौ सारी बात इक्कीस है, औ तौ बिना बिरामण नै पूछियांई करै जेड़ौ काम है।
चरण – पूछिया ओ पूछिया! सगाई ब्याव री बातां में थे मरद कंईं समझौ। अै तौ लुगायां रा काम है।
भोळा – देखो जी, म्हारी तौ आदत लैक्चर देवण री है, सुणण री नहीं। बस म्हैं जो कर दियौ जकौ सब ठीक है।
चरण – (रीस में) वा, कर दियौ तौ करम फूटा थांरा! म्हें ई देखूं कीकर हुवै औ ब्याव? अड़की घोचा थे आज रा थोड़ाई हौ (जावै)।
भोळा – अरै जावौ क्यूं? म्हैं थांनै आ बात रीस में थोड़ैई कैयी है?
चरण – (जावती जावती) रीस फेर कीकर हुवै? म्हैं ई देखूं कै थे चावौ ज्यूं हुवै कै म्हैं चावूं ज्यू? (जावै पण भोळारामजी हाथ पकड़ नै पाछी लावै)
भोळा – अरे बाबा, म्हैं जीतियौ नै थां हारिया। अच्छा, अबै थां बतावौ कै इण सगपण में कंईं कसर है? सासू सुसरा है, घर घराणौं है, लड़की बी.अे. पास। पछै थारै कंईं चाहिजै?
चरण – बी.अे. पास नै चाटै कंईं? ब्याव में खास तौ देणा-लेणा देखीजै।
भौळा – देणा-लेणा?
चरण – हां हां देणा लैणा। देणा-लेणा री कंईं बात हुई?
भोळा – देणा-लेणा री तौ आ’ईज बात हुई कै इण हाथ देणा नै उण हाथ लेणा।
चरण – थांनै पाधरी बात कैवतां सरम आवै कंईं?
भोळा – म्हैं तौ सैंग बात पाधरी’ज कैऊं पण..
चरण – पण म्हारौ हियौ सिरक्योड़ौ है, क्यूं?
भोळा – देखौ अबै तुळी थां लगाई कै म्हैं?
चरण – इण में तुळी थां लगावण रौ कंईं काम? थां पाधरी व्है जिकी बात ईज कौ कनीं?
भोळा – बात आ’ है कै नाथूरामजी नै चोखा नै घराणा रा आदमी जाण नै म्हैं देणा-लेणा री बात ईज कोनीं करी।
चरण – कंईं कैयौ? देणा-लेणा री बात ई कोनीं करी?
भोळा – आं हां।
चरण – नै वै’ कालै सूखाई टरका देई तौ?
भोळा – सूखा नै आला कीकर..?
चरण – यानी आपां मांगां जकी चीजां नहीं दीवी तौ?
भोळा – आपां उणां में कीं मांगां हां कंईं?
चरण – थांरा तौ सिरक गया है हिया! डाक्टर नै परणीजण रा मूंडा धोई जकां नै तौ झक मार नै झाल भरियौ दायजौ देवणौ पड़ी।
भोळा – परणीजण रौ मूंडौ तौ नाथूरामजी री बेटी धोयौ है। वा कमावै थोड़ै ई है जकौ आपांनै झाल भर नै दायजौ देवै।
चरण – थांरौ तौ दिमाग फेल व्है ग्यौ। पाधरी बात कैऊं तोई थांनै तौ वा ऊंधी ईज लागै। म्हारी बात नै कान खोलनै सुण लौ।
भोळा – फरमावौ।
चरण – म्हैं तौ म्हारै भाई नै नाथूरामजी कनै भेजनै देणा-लेणा री बात पक्की कराऊंला नै अगर वै म्हारी सरतां मंजूर नहीं कर ली तौ औ सगपण कदैई नहीं हू सकैला।
भोळा - कंईं कौ’।
चरण – म्हैं म्हारै कपड़ा माथै लैंप रौ तेल न्हाक नै बळ जाऊंला पण ओ ब्याव कदैई नहीं हुवण दूंला। हिया फूट ग्या है थांरा सात ठौड़ ऊं! (गुस्सै में जावै परी)
भोळा – (जावती देखनै) बाप रै बाप! आ’ लुगाई है कै तामजाम? भगवान! थूं सकळ नै अैड़ौ बंब रौ गोळौ दीजै।
(पड़दौ पड़ै)
दूजौ-दरसाव
(नाथूरामजी रै घर रौ अेक कमरौ। सुबै दस बजियां री टेम)
नाथू – भोळारामजी तौ वाकैई भोळा ईज है। लालच तौ उणां रै कनै तक व्है नै नहीं निकळियौ। इण जमाना में तौ अैड़ा आदमी देवता व्है ज्यूं लागै। म्हैं तो कैऊं कै हे भगवान! थूं सकळ नै अैड़ौ सग्गौ दीजै।
(राधाकिशनजी आवै)
राधा – (नाथूरामजी कानीं देखनै) जै माताजी री सा।
नाथू – ओ हौ! पधारौ राधाकिसनजी सा, पधारौ। आज आ’ किरपा कीकर कीवी?
राधा – किरपा त्तौ बडा आदमियां री कयी है। म्हैं तौ यूं ई आप सूं मिळण नै आय ग्यौ।
नाथू – फरमावौ, कंई हुकम है?
राधा – हुकम आप रौ, बडा तौ आप हौ कै?
नाथू – लायकी में आप कम क्यूं होवौ? आप भी तौ भोळारामजी रा साळा हौ कै? आपांणै सगपण री ठा’ तौ आपनै दूजैई दिन पड़गी हुवैला।
राधा – दूजै दिन क्यूं म्हनै ती उणी दिन ठा’ पड़गी ही। आप भी भोळाराम जी रै. भोळापणै रौ खूब फायदौ उठायौ।
नाथू – आ’ आप कंईं फरमा रैया हौ?
राधा – म्हैं बिल्कुल ठीक कै रैयौ हूं। उठी तौ वै भोळा, नै अठी नै आप गजब रा गोळा!
नाथू – आपरौ मतळब म्हनै कीं समज में नी आयौ। आप कैवणी चावौ जकौ फरमावौ कनीं।
राधा – आप रै मतलब क्यूं समज में आवै? आपरी जगां म्हैं होऊं तौ म्हारै ई आपरै ज्यूं कीं समज में कोनीं आवै।
नाथू – आप तौ म्हनै जाणै आडियां घाल रैया हौ। अरै सा, आप आपरी बात रौ खुलासौ तौ करावौ जकौ म्हनै की ठा’ तौ पड़ै।
राधा – खुलासा तौ आप सैंग करनै इज आया हौ, पछै अबै म्हैं खुलासा कंईं करूं?
नाथू – तौ भी आप भी तौ कीं फरमा सकौ हौ। म्हारै तौ आप भी सिरदार हौ नै म्हैं तौ सैंग सिरदारां रै हुकम री तामील करण वाळौ हूं।
राधा – म्हैं आपरै कनै म्हारै मन सूं ईज नीं आयौ हूं?
नाथू – तौ आपनै कोई पकड़ नै..
राधा – आप पैली म्हारी बात तौ पूरी सुणलौ।
नाथू – फरमावौ।
राधा – भोळारामजी बैनोईसा इण सगपण में घर री औरतां तक री राय नहीं लीवी है नै आप जाणौ ईज हौ कै औ काम औरतां रौ है, आदमियां रौ नहीं।
नाथू – पछै अबै? म्हैं तौ उणां नै अरज की ही कै घर में पूछ लिरावौ, पण..
राधा – पण कंईं?
नाथू – पण वै ईज फरमायौ कै म्हैं सैंग निवड़ लूं ला।
राधा – वै सैंग निवड़ण वाळा हुवै कुण है? आपरी बेटी नै सारी ऊमर म्हारी बैन यानी उणरी सासू कनै काडणी है। इत्तौ होतां हुवां भी आप हाल आ’ समझौ हौ कंईं कै म्हारी बैन री राय बिना ई’ औ ब्याव हु जावैला?
नाथू – तौ आपरी बैन कंईं चावै? म्हैं वांनै नाराज थोड़ाई करणी चाऊं।
राधा – म्हनै पूछौ जकौ आप किसा कोनी जाणौ कै जका सिरदार आपरी बेटी डाक्टरी पास वाळा नै परणासी जकां नै कंईं करणौ पड़सी।
नाथू – आप बात नै मलगोबै मती रखावौ। आप म्हनै साफ-साफ बता दिरावौ कै आप नै आपरी बैन कंईं चावौ।
राधा – अरै बापजी, म्हनै गरीब नै बिच्चै क्यूं घालो? म्हैं तौ आपनै उणां रौ सनेसौ करण नै आयौ हूं।
नाथू – आछौ, जद आप सनेसा करता फिरौ?
राधा – आप चावौ ज्यूं समझौ। बाजबी बात हुवै जकी तौ कैवणी’ज पड़ै।
नाथू – उण बाजबी बात रौ कीं खुलासौ तौ करावौ।
राधा – खुलासौ करण रै पैली आप आ तौ फरमावौ कै आपरौ म्हारै भाणजा रै साथै आपरी लड़की रौ फागण में ब्याव करण रौ इरादौ तौ पक्कौ है?
नाथू – अरै भई! पक्कौ फेर कैड़ौ’क हुवै? आप फरमावौ तौ म्हैं आपनै लिख नै देवण नै त्यार हूं।
राधा – नहीं, नहीं, लिख नै देवण री की जरूरत कोनीं। आपरौ फरमावणौ ई भ्होत है।
नाथू – अबै आपरै कंईं चाहिजै?
राधा – नाथूरामजी, बात आ है कै आजकल री ब्याव सगायां कीकर हुवै वा आप सूं छानी नहीं है। इण वास्तै म्हैं अबै आपने ज्यादा कंईं कैऊं?
नाथू – आ’ तौ म्हनै सैंग ठा’ है पण बात रौ खुलासौ तौ म्हैं..
राधा – बात आ’ है कै म्हैं चावां कै ब्याव तौ जोरां-सोरां सूं ईज हूणौ चाहिजै।
नाथू – जोरां-सोरां सूं कीकर?
राधा – यानी हरेक काम अेकदम इक्कीस व्हैणौ चाहिजै ताकै चार जणा देखै तौ सही।
नाथू – काम सैंग इक्कीस ईज हुवैला नै चार जणा क्यूं सारी बरात देखैला।
राधा – पण ब्याव भी तौ कोई देखें जैड़ौ व्हैणौ चाहिजै?
नाथू – तौ आपरौ मतळब है कै ब्याव नै कोई देखैला ई कोनी?
राधा – अरै सा, यूं नहीं। म्हारौ मतळब खाली धूमधाम नै चमक-दमक सूं ईज नहीं है।
नाथू – तौ पछै आप रौ मतळब किण चीज सूं है, वा’ तौ फरमावौ।
राधा – (जेब सूं अेक कागद काड नै नाथूरामजी नै देवै) म्हैं तौ आपनै मंजूर हुवै तौ अैड़ौ ब्याव चावां।
नाथू – (कागद नै पढै) सोनौ मौहर पचास, चांदी तोळा तीन सौ, स्कूटर, घड़ी, रेडियौ, छत रा पंखा-2, बेस पचास–चाळीस सिलक रा नै दस सूती, बरतन-बासण आधा चांदी रा नै आधा कळी रा व इस्टेनलैस इस्टील रा नै सरदा सारू रोकड़ जकी रकम कम सूं कम पांच हजार तौ व्हैणीज चाहिजै। बढ़ार पांच सौ आदमियां री। प्याला में कम सूं कम पांच सौ कळदार रोकड़। सजनगोठ अेक ब्याव रै पैली नै बाकी री ब्याव रै पछै। बरातियां नै अेक चांदी री गिलास अर नौकरां नै अेक-अेक केसरिया साफौ। (कागज पढ़ नै राधाकिसनजी कानीं देखनै) इण रै अलावा और कीं चीज बाकी तौ कोनी?
राधा – बस, इत्ती चीजां किसी कम है? नै यूं पछै बाई-बूढ़ी हुवै देणा-लेणा बूढ़ा थोड़ाई हुवै–आप देवणवाळा नै म्हे लेवणवाळा।
नाथू – अगर आप रै कैवण रौ औ मतळब है कै अै चीजां देऊं जदैईज ब्या'व हौ सकै है अर नीं तौ नहीं, तौ म्हनै 'सरतां मजबूरी हालत में मंजूर है।
राधा – देखौ सा, इण में मजबूरी रौ काम नहीं है औ तौ सीदौ सादौ सौदौ है। आपनै पूरवै तौ आप मंजूर करावौ। आपांणी इण में जबरदस्ती बिलकुल नहीं है। आपांणै तौ आप नहीं तौ दूजा माथौ मांडणवाळा घणा।
नाथू – आपरौ कैणौ बिलकुल ठीक है। हाथ में होवै नाणौ तौ बींद परणीजै काणौ। आपरौ भाणजौ डाक्टर है सौ उणनै बहुवां किती नहीं?
राधा – बस, बस, अबै आपरै बात फिटोफिट समझ में आई है। आपनै सब सरतां मंजूर है?
नाथू – मंजूर।
राधा – सावौ फागण बदी नम्यूं रौ है सो आप उण रै पैली-पैली त्यारी कर लीजौ।
नाथू – जो हुकम।
राधा – वा, तौ म्हैं अबै सीख करू?
नाथू – आपनै भ्हौत तकलीफ हुई।
राधा – नहीं, नहीं, इण में कैणरी तकलीफ? आछौ, जै माताजी री। (जावै)
नाथू – जै माताजी री। फागण बदी नम्यूं, सिरफ डौड महीनौ नै इत्ती त्यारी। इत्ती थोड़ी टैम में सैंग काम कीकर हुवैला? पण यां ब्याव रा सौदागरां नै वां सनेसाखोरां नै इण सूं कंईं मतळब? अै तौ ‘बींद मरौ बींदणी मरौ, बामण रौ टक्कौ त्यार’ वाळा में है। भौळा भोळारामजी नै कंईं ठा’ कै वांरी बहू म्हनै कैड़ौ आकरौ पावड़ौ घालियौ है पण अबै इण बात नै उठा नै काम नै बिगाड़णौ है। बेटी रा बाप तौ आज तक लूटीजताई आया है, इण में नवी बात कंईं है? सित्यानास में साढ़ी सित्यानास ई सही। अैड़ी हंसी खुसी रै मौका माथै किणी री हंसी खुसी री पुरणाहुती ई सही–पण इण काम नै तौ ज्यूं व्है ज्यूं निपटावणौ इज पड़ैला। ओ अबै म्हारी इज्जत रौ सवाल बणग्यौ है। जठै इज्जत है उठै सब कुछ है, जठै इज्जत नहीं उठै कीं नहीं। (उपर देखनै) हे भगवान! इण संकट में थूं म्हारी लाज राख जै।
(पड़दौ पड़ै)
तीजौ-दरसाव
(नाथुरामजी रौ घर। ब्याव री सजावट। बरात बैठी है नै मनवारां होय रैयी है। च्यारूं कानी धूमधाम माच्योड़ी है। भोळारामजी कठै ही दीसै नहीं। दो-अेक जानियां उभा बातां कर रैया है। राधाकिसनजी आवै।)
राधा – क्यूं सा, मान-मनुवार दूजी कैड़ीक’ रैयी?
पैलौ जानीयौ – वाह सा वाह! सरबरा रौ कंई कैणौ है! धाम-धाम नै दूध चाय पी रैया है।
दूजौ जांनियो – चौसरा भी बढिया है–जैपर सूं मंगाया दिखै है।
राधा – मंगावै नीं तौ म्हनै जाणै है कै नहीं, आछी तरैऊं कसिया है म्हैं नाथूरामजी नै, जरै अै ठाट हुवा है, नीं तौ बैनोई सा रै भरोसै तौ अै धूड़ उडायनै रै जावता। (आगै निकळ जावै)!
तीजौ जांनियौ – भई कीं कौ, आपानै तौ आ’ बात कीं जची नहीं। सग्गा नै इण तरै चूसणौ भीं कंईं काम रौ नै वो भी बींद रा बाप नै नाराज करनै! (पान री मनुवार लेवै)
दूजौ जांनियौ – हां भाई जी, म्हारै आ’ समझ में नहीं आई कै भोळारामजी बरात में क्यूं नहीं आया? खास ब्याव रा मालिक इज गायब!
पैलौ जांनियौ – (पान वाळा नै ना देवै नै वो जावै परौ। अेक जणौ दूध री गिलासां लेय नै आवै उण मांय सूं अेक उठाय नै) लौ लिछमीनराण जी, पीवौ (तीजौ जांनियै नै धामै)
तीजौ जांनियौ – नहीं सा! म्हैं तौ दो पी चुकौ हूं नै हमै तौ पान भी खाय लियौ है।
मांडियौ – तौ कंईं हरज है सा। पान थूक दिरावौ, दूध पी’नै फेर अरोग लीजौ।
तीजौ जांनियौ – नहीं सा, अबै नीं चलै। यां नै दिरावौ (दोनां नै) लौ लौ, पूसारामजी नै आप भी लौ मुकनजी। (दोनूं अेक गिलास उठाय नै पीवै। मनवार वाळौ जावै) आप कौ कै भोळारामजी क्यूं नीं आया पण लाई आवै कठाऊं? (धीमै सैक मूंडौ नैड़ौ करनै) अै राधाकिसनजी वांरी नाक इज उतार लीवी।
दूजौ जांनियौ – क्यूं..क्यूं कंईं हुवौ? म्हनै तौ कीं ठा’ कोनी।
पैलौ जानियौ – हुवै कंईं? वै लेण-देण रै खिलाफ है नै वै सगाई तै करी जद नाथूरामजी नै साफ-साफ कैय दियौ हौ कै लेणौ-देणौ सैंग आपरी मरजी माफक। म्हैं कीं नीं मांगूं।
दूजौ जांनियौ – पछै।
तीजौ जांनियौ – पछै कंईं? लुगांया नै तौ आप जाणौ हौ कै। वानै आ’ बात जची कोनी। जद मेलिया राधाकिसनजी नै नाथूरामजी रै अठै नै दायजै री पूरी फैरिस्त मेली वांरै साथै सो वै सैंग तै करनै आया।
दूजौ जानियौ – अच्छा! आ’ हुई कंईं?
तीजौ जांनियौ – नीं तौ पछै? इण सूं भोळारामजी नाराज व्हैगा नै ब्याव में आवणौ मंजूर नहीं कियौ।
दूजौ जांनियौ – जरैं हमै वै किणी काम में हाथ नीं घालै?
पैलौ जांनियौ – आं हां। बैन भाई मिळनै सैंग ब्याव रा सराजाम आपरै मन माफक किया है।
तीजौ जांनियौ – जरैं कंईं? धूड़ घालौ इण ठाट-बाट में। बींद रौ बाप ई नहीं जरैं ब्याव रौ कंईं मजौ?
पैलौ जानियौ – ईं में कंईं सक? (चौथो जांनियौ रामरतनजी नै आवता देखनै कैवै) कंईं रामरतनजी! हालौ घरै हालौ’क? (रामरतनजी नैड़ा आ जावै) हमै आपांनै ठैरण सूं कंईं मतळब? मान-मनुवार पूरी हुयी ईज है, आगै तौ बींद जाणै नै बींद रा मामा जाणै।
दूजौ जांनियौ – क्यूं कै बींद रा बाप तौ आया कोनीं। हमै तौ मामा इज है करणिया-धरणिया।
रामरतन – वो तौ ठीक है पण थोड़ासा ठैरौ। मामाजी अेक नवौ बिच्छू छेड़ियौ है जकौ देखौ कंईं गुल खिलै?
पैलौ जांनियौ – है? कंईं हुवौ भाई? कीं बतावौ तौ सरी।
दूजौ जानियौ – हम भेर कंईं नवौ बिच्छू छेड़ियौ है? कीं कसर रैयगी ही कंईं?
रामरतन – आ’ईज तो बात है। म्हैं हमार राधाकिसनजी कनऊं ईज आयौ हूं। वै हमै आ मांग धरी है कै डाक्टर कैवै है म्हैं साईकल रा घोचटा नै कंईं करू? म्हनै तौ स्कूटर दिरावौ।
तीजौ जानियौं – डाक्टर तौ लाई अैड़ी बात कैवै जैड़ौ कोनी। म्हनै तौ आ’ मामाजी री ईज चाल दीखै।
रामरतन – भाई, थे समजिया नहीं। मांयै अेक है। सैंग मिलियोड़ा है नै यां बातां री चाबी भरण वाळी तौ खास बींद री मां ईज है।
पैलो जांनियौं – नै मां रै सामनै बोलण री डाक्टर री भी हिम्मत कोनीं।
रामरतन – हां, तौ पछै बाप ऊं ई नहीं बोलीजै जरै बेटा कंईं बोलै?
दूजौ जांनियौं - हां तौ पछै कंईं हुवौ? मंजूर कर लियौ नाथूरामजी?
रामरतन – कठासूं मंजूर करलै लाई? उण गरीब नै पैलैई सूंत तौ लियौ। वो तौ कीकर ई आ’ देखनै कै लड़कौ पढियो लिखियौ है, टूंपौ खाय नै ब्याव कर रैयौ है पण हमै ऊभ घड़ी में स्कूटर कठा सूं लावै?
तीजौ जांनियौ – तौ हमार देवण रौ कैवै है कंईं?
रामरतन – आ’ ई तो बात है। मामाजी फरमावै है के पेला स्कूटर रा रिपिया साडी पांच हजार मूंडा आगै लाय नै धरौ, तौ म्हारौ भाणजौ चंवरी में जावै । पछे स्कूटर म्हैं म्हारै खरीद लेवां घणोई ।
तीजौ जांनियौ – आ तौ पछै राधाकिसनजी हद करदी! आखिर हुवौ कंईं?
रामरतन – हुवै कंईं? हाल तौ नाथूरामजी हां ना दियौ कोनीं है नै फेर सल्ला करणनै घर में गया है। जरैं ई तो कंऊं कै ठैरौ थोड़ा। देखां तो सरी, कंईं गुल खिलै।
तीजौ जांनियौ – हां..हां, अैड़ी बात है तो जरूर ठैरां।
(अेकाअेक बींदणी चित्तरलेखा आवती दीखै)
अरै! औ कंईं? आ’ तौ बींदणी बारै आयगी दीसै? (जानिया सैंग अेकठा हुजावै नै अचम्भै सूं चित्तरलेखा कानी देखै।)
चित्तरलेखा – बुजर्गां, भाइयां नै मिनखां रौ बौपारं करणियां। म्हैं आप नै दो सबद
अरज करणनै आई हूं। आपांरी जात में आज औ पैलौ मौकौ है कै परणीजण वाळी खुद जानियां रै सामनै आय नै आपरै दिल री बात सुणावै। पण लाचारी है, जिणसूं म्हनै आवणौ पड़ियौ। म्हारा बाबूजी म्हारै ब्याव में आपरा बूता सूं भी ज्यादा खरच कर काडियौ है पण तौ भी म्हारा सासरावाळां रौ काळजौ ठरियौ नहीं। आपनै आ’तौ ठा’इज व्हैला कै इण ब्याव नै तै करण सारू बींद रा बाप री मरजी रै खिलाफ वांरा दूजा सगा संबंधी म्हारै बाबूजी कना सूं कौडी कौडी चीज मांग नै ली है, पण वांरी फड़द तोई अधूरीज रैगी; हमैं वै कै रैया है कै साईकल री जगां म्हनै तौ स्कूटर दौ। जका स्कूटर लियां बिना चंवरी में ई जावण नै त्यार नहीं है वै भला मोटर लियां बिना फेरा कद खावैला? म्हारौ बाप कोई लखपती तौ है नहीं नै नीं म्हारा घर में कोई कलप ब्रिख रौ रूंखड़ौ ई है जकौ जो मांगौ वोई झट दे दै। और दे भी सकै तौ इण तरै रौ आड़ौ करनै लेवण वाळा लोभी लोगां रै साथै म्हारौ निभाव व्हैणौ दोरौ ईज है। म्हारा बाबूजी पैलांई करजा में कळीज रैया है नै हमै भेर अै वियां नै पूरा ई डुबावणौ चावै सौ अै काम सगां गनायतां रा नहीं। अै तौ दुस्मणां जैड़ा काम है। इण रै वास्तै म्हैं फैसलौ कियौ है कै म्हैं जीवती माखी नहीं गिटूंला अर म्हनै चाहै जित्ता दुख देखणा पड़ै, पण म्हैं यां लोगारै पानै नीं पडूला। ओ ब्याव म्हैं रद्द करूं हूं।
राधाकिसन – (गरम होय नै) वा, वा! बंद कर थारी जबान! अैड़ी बेसरम छोकरी नै घर में लाय नै कंईं छोरां नै डुबावणौ है? चालौ डाक्टर, घरै चालौ। को परणीजणौ नीं इणनै (डाक्टर नै अवाज देयनै कैवै। डाक्टर आवै)।
डाक्टर – नहीं, मामाजी! ठैरौ! अबै म्हैं पढियौ-लिखियौ आदमी अगर चुप रैह जाऊंला तौ म्हारी पढ़ाई कलंकित हु जावैला। म्हैं आपरौ नै मां रौ घणोई कैणौ मानियौ। इण रै लारै पिताजी नै नाराज किया नै परणीजण नै आयौ। पण आप तौ हद करदी । म्हारै बिना पूछियां म्हारै नाम सूं आप औ जुलम करौ?
नाथूरामजी – (अचम्भै सूं) हैं! तौ आप नहीं फुरमायौ स्कूटर रौ?
डाक्टर – म्हैं गैलौ हूं कंईं जकौ अैड़ी बेहूदी बात करूं? ठीक है, यां लोगां रै कैणा-कैणा सूं म्हैं इत्ता नाच-नाच लिया पण अब आ बदनामी उठाय नै तौ म्हारौ इज्जत सूं जीवणौ ई मुसकिल हुय जावैला। म्हैं आपनै विस्वास दिराऊं हूं कै म्हनै नै म्हारा बाप नै कीं नहीं चहिजै। आप जित्ती माल करजौ करनै खरीदियौ है वो सगळौ पाछौ बेच नै करजौ चुका दिरावौ। म्हनै कोई दायजौ मंजूर नहीं है। अैड़ी दबंग नै बिचारवान लड़की म्हारौ सबसूं बड़ौ दायजौ है।
मांडिया व नौजवान जांनिया – (अेकै साथै) साबास! साबास!
तीजौ जानियौं – आज आपांरा देस में अैड़ा नौजवानां री ईज जरूरत है।
डाक्टर – (नाथूरामजी सूं) म्हां कांनी री गळतियां माफ करावौ नै मांय पधारौ। औ ब्याव व्हैला नै जरूर व्हैला।
तीजौ जांनियौं – (चित्तरलेखा नै अेक माळा देवै) लौ बींदणी! आ माळा बींद राजा नै अठै ईज पैराय दो हमै। आप री बात यां आज राखी है तौ हमेसां ही राखैला। (चित्तरलेखा माळा लेयनै डाक्टर नै पैरावै। डाक्टर आपरै गळै री माळा पाछी उणनै पैरावै। सेवग संख बजाय देवै नै राधाकिसन जी मूंडौ पिलकाय नै जावै परा नै नाथूरामजी बींद नै छाती सूं लगाय लेवै। सब जणा ताळियां बजावै।
(पड़दौ पड़ै।)