पात्र
हेम बाबू – काम दिराऊ मैकमै का अेक अफसर
सरोज – हेम बाबू री लुगाई
बाबूराम – हेम बाबू रौ संगळियौ
चौखटानंद – अेक नेता
रामू – अेक बी.अे. पास बेकार
(चपड़ासी, उम्मेदवार वगैरा)
पैलो-दरसाव
(सुबै री टेम हेम बाबू आपरै घर में बैठा रेडियौ सुणै है। अेक पसवाड़ै वांरौ अेक टाबर मिनकी सूं किलोळां करै है। दूजी कानीं सरोज पोथी रा पानड़ा उथेळै। इत्तै में फोन री घंटी बाजै। हेम बाबू रिसीवर उठा’र कान सूं लगावै।)
हेम – हां, हां म्हैं हेम बाबू बौलूं हूं। कुण बाबू राम? अरै भाई कंईं हाल चाल है?.. हैं?.. हां वौ तो है ई। बोलौ कीकर याद फरमाई? म्हारै लायक कोई सेवा चाकरी हुवै तो बोलौ। (सुण नै) हां, हां, बोल भाई! थारौ काम तौ करणोई पड़सी। भेळा रमियोड़ा लंगोटिया यार हां। हं हं हं (हंसै पछै ध्यान सूं सुण नै) हां..ठीक ठीक.. नही, नहीं भूल कीकर जाऊं भाई! म्हनै याद है। अच्छा, नमस्ते (रिसीवर धर देवै)।
सरोज – कई बात है?
हेम – बात कंईं होवै, आ’ई सिफारस री बात है। आज इंस्पैक्टरां री इंटरव्यू है कै? कैवै कै कौ सोवन नै भेजूं हूं जकौ ध्यान राखजौ। म्हारौ खास आदमी है। हमैं म्है किण रौ ध्यान राखूं। रावली घोड़ी’र सौ असवार।
सरोज – तौ कंईं व्है? मोटा अफसर हौ। आपरै आदमी रौ मलतब पूरौ करणौई चहिजै।
हेम – पण हूं अब किण नै राजी राखूं नै किण नै बेराजी? अेक अर खसम सौ। (भळै फोन री घंटी बाजै। रिसीवर उठावै नै बात करै) हलौ! हां म्हैं हेम बोल रैयौ हूं। अच्छा विमल? बोल भाई, कंई बात है? आज यूं सुदियौ सुदियौ कीकर है? है? अरै, इसी कंई बात व्हैगी..? (फेर सुणै) हां..हां..पण भाई विमल! बात आ है कै जगा तौ है अेक नै उम्मेदवार है घणा। हमै म्हैं किण नै लूं नै किण नै छोडूं? थूं ई बता। (सुण नै) है? खैर..देखूंला। (रिसीवर धर देवै)
सरोज – औ किण रै वास्तै कैवै है?
हेम – अरै बाबा, वो पेसगार रौ छोरौ है के? उणारै वास्तै कै रैयौ है। कैवै कै दो दिनां सूं म्हारा कान खा रैयौ है कै म्हारी सिफारस कर दौ।
सरोज – आई तो कैऊं कै इंटरव्यूं कंईं औ तौ जीव रौ अेक जंजाळ हूयग्यौ। यां सिफारस्यां रै आगै तौ जान री घ्यारी मंडगी। (उठनै) लौ हमै निपट लूं नी तौ मोड़ौ हु जासी। (जावै)।
(पड़दौ पड़ै)
दूजौ-दरसाव
(हेम बाबू आपरै दफ्तर में बैठा उम्मेदवारां री दरखास्तां परैळै है। इत्तै में चपड़ासी अेक पुरजी लाय’र देवै। पुरजी बांचै। चपड़ासी नै बारै ऊभै मिनख नै भीतर बुलावण री सैण करै। अेक खद्दर धारी हाथ में झोळौ लियां मांय बड़ै।)
हेम – (उभा व्हैनै) ओ हौ! आप! पधारौ सा, नेताजी। आज धिन घड़ी धिन भाग जिकौ घरै बैठा ई दरसण व्हैगा। फरमावौ, कीकर पधारणौ हुवौ (कुरसी कानीं सैण कर’र) बिराजौ सा।
चोखटा – (कुरसी पर बैठ नै) हूं तौ अठै नेड़ै वाळै दफ्तर में आयौ हो। सोच्यौ चालतौ बाबूजी री हाजरी भी बजाता चालूं। हौ तौ मजै में?
हेम – हां, सा। नेतावां री किरपा चाहिजै। पछै कंईं बात रौ डर? पांचूं घी में अर सिर कड़ाई में।
चोखटा – हां तौ साब, अेक इंटरव्यू सुणियौ हौ। कद तांई हुवैला?
हेम – वो तौ आगली पैली तारीख नै हूसी। क्यूं कंईं बात है?
चोखटा – औई थोड़ौ ख्याल राखजौ। म्हारै साळै रौ बेटौ मोवनौ भी इंटरव्यू में आवैला। आप घर रा ई आदमी हौ। आपनै कंईं कैवां। थोड़ौ ध्यान राखजौ। आपणौ खास आदमी है।
हेम – ठीक सा। और कोई हुकम चाकरी?
चोखटा – बस मौज है। तौ सीख करूं? अेक मीटिंग में जावणौ है। हां तौ आप भूल मत जाइजौ। आंपणौ खास आदमी है। (कैवतौ कैवतौ जावै।)
हेम – (अपणै आप) औ इंटरव्यू कंईं हुवौ, जान रौ झगड़ौ मंड ग्यौ। हूं अबै कुवै में पड़ूं कै खाड में? कंथौ अेक, परदेस घणा वाळी बात हौ रैयी है। (इत्तै में फोन री घंटी बाजै नै हेम बाबू रिसीवर उठाय नै कान सूं लगावै।)
हेम – हलौ! हां..हां.. म्हैं ई हेम बाबू हूं। फरमावौ। कुण? मंत्री जी रा पी.अे साब? हां..हां.. फरमावौ कंई हुकुम है? इंटरव्यू तौ पैली तारीख नै हुवैला। बोलौ कंईं करणौ है?
हेम – (बात सुणनै) ठीक है सा। ध्यान राख सूं.. पण साब जगां तौ अेक है अर उम्मेदवार.. हां, हां.. वा तौ है ई सा.. म्हारौ मतळब औ नहीं है। मिनिस्टर साब रौ हुकम सिर आंख्यां माथै। हां हां, हां.. इत्तौ तौ म्हैं ई समझूं हूं सा। पण आप भी ओखाणौ नामी सुणायौ कै ध्यान नीं राखियौ तौ घर घोसियां रा बळैला पण सुखी तौ ऊंदरा ई कोनी हुवै। ठीक सा ऊंदरा नै जीवणौ हूसी तौ मिनिस्टर साब रौ खास आदमी ईज लिरीजसी। (रिसीवर धरै।)
(पड़दौ पड़ै।)
तीजौ-दरसाव
(हेम बाबू री रसोई। हेम बाबू रौ मूंडौ उतरियोड़ौ है। अळसायौड़ी आंख्यां, थाक्योड़ौ सरीर। होळै होळै रोटी रा कौर उगळै है। सरोज कनै बैठी जिमावै। हेम बाबू री उदासी देख’र सरोज कैवै।)
सरोज – आज कंईं बात है? इतेती उदासी कीकर? दफ्तर में घणौ काम रैवै है कंईं। यूं जान दे’र कमाई कियोड़ी किण काम री?
हेम – खैर अै तौ जीवतै जी रै यूं ई झगड़ा रैसी। आज थारै पी’र सूं कागद आयौ जिण में कंईं लिखियौ है?
सरोज – काकोजी लिखियौ है कै पैली तारीख नै जकौ इंटरव्यूं हौ रैयौ है, उण में आपणै अेक खास आदमी नै भेजूं हूं सो ले लिज्यौ। बौत भलौ अर हुंस्यार आदमी है।
हेम – पण जगा तौ अेक री है। थूं कंईं जाणै कोनी। कित्ता आदमी लारै पड़ रैया है।
सरोज – जकौ कंईं व्है बैठा रैई दूजा। पैली घरकां नै लौ। घर रा पूत कंवारा डोलै, पाड़ोसी रा फेरा। आ कठै री रीत है? काकोजी कंईं थांनै बार-बार लिखैला? औ तौ कोई इस्योई मौकौ आयग्यौ है।
हेम – थूं गैली बात कीकर करै? हूं मिनिस्टर साब री बात राखूं कै थारै काकोजी री?
सरोज – (रीस में आय’र) तौ मिनिस्टर कोई म्हां सूं लांठौ है? दूजा सारा बैठा रैवैला। काकोजी रौ आदमी पैली लागणौ चहिजै।
हेम – तौ थे म्हनै डरा’र काम बणावणौ चावौ हौ कंईं?
सरोज – (ठरकै सूं) हां, औ काम होणौ चहिजै। म्हारै पी’र में मां बाप नीं, भाई बहन नीं। अेक बापड़ा काकोजी म्हनै पाळ-पोस’र परणाई मुकळाई; अर आज उणां रौ अेक जरा सौ काम नीं करौला तौ हूं वानै भळै कीकर मूंडो दिखाऊंला?
(चपड़ासी आवै।)
चपड़ासी – बारै अेक छोरौ ऊभौ आपरी बाट जोवै है। कंईं कैऊं?
हेम – जा कैदे कै हमार जीम’र आऊं हूं। ठा नीं, बापड़ौ कोई कित्ता सुगन साज’र आयौ हुवैला। (चपड़ासी जावै।)
सरोज – हां तौ हूं काकोजी नै कंईं लिखूं? कंईं कैवौ हौ?
हेम – (जावतां-जावतां) ठीक है। हूं बिचार करूंला। अेकर वांनै कीं मत लिख। भळै हूं लिख दूंला। (आपै ई बरड़ावता जावै) और तौ बैरी हुवा सो हुवा, अब तौ घरवाळी ई स्यान लेवण नै त्यार हूगी। खैर देखी जावैला?
चोथौ-दरसाव
(हेम बाबू री बारली बैठक। रात रा आठ बजिया री टेम। बैठक रै अेक खूणै में भेळौ हुयोड़ौ ओळा मार्योड़ी कमेड़ी रै दांई रामू बैठौ है। मूंडै पर अेक’र आसा री चिमक दीखै तौ बीजै खण निरासा री काळस। हेम बाबू नै आवतां देख’र ऊभौ हुवै।
रामू – नमस्कार! बाबूजी।
हेम – आव भाई! कंईं काम आवणौ हुवौ? कंईं नाम थारौ?
रामू – सा, म्हारौ नाम रामलाल है। पैली तारीख नै होवण वाळी इंटरव्यू रौ उम्मेदवार हूं। बी.अे. पास हूं। पण किणी री सिफारस नीं हुवण सूं आज ताईं बेकार फिरूं हूं। म्हारै तौ आपरी ईज सिफारस है। (कैवतौ-कैवतौ गळगळौ हू जावै।)
हेम – तौ भाई, किणी लांठै मिनख री सिफारस कोनीं कंईं?
रामू – नीं साब।
हेम – (गैरी निसांस न्हाक नै) ठीक है ध्यान में राख सूं। और कोई काम है? हां, हूं तौ बूझणौ ई भूलग्यौ तूं जीम्यौ कै नहीं?
रामू – (सरमावतौ सरमावतौ) नहीं सा।
हेम – (चपरासी नै हेलौ देवै) अरै भई, ई लड़कै नै जिमाय नै सुवा देई।
चपरासी – ठीक सा।
(हेम बाबू घर में जाणौ चावै। इत्तै में अेक डैण लाठी टेकतौ आ’र कागद देवै। हेम बाबू डैण नै ध्यान सूं देखता-देखता कागद खोल’र बांचै।)
हेम – (कागद सूं) चीरूं हेमू सेती लिखी चाडवास सूं भूवाजी री आसीस बांचजौ। अपरंच कागद लावण वाळाऔ आपणौ खास आदमी है। इण रौ बेटौ बी.अे. पास है। थां घणा मोटा अफसर हौ सौ इण रै बेटै री कोई ऊंचै औदै पर नौकरी लगा देवोला। औ आंपणौ खास आदमी है अर हूं थांनै बरियां-बरियां को लिखूं ला नीं।
(कागद बांचता-बाचतां हाथ सूं छूट जावै)
पांचवौ-दरसाव
(हेम बाबू रौ दफ्तर। दिन री दो बजियां री टेम। दफ्तर रै आगै इंटरव्यू होणै रै बाद उम्मेदवारां री भीड़ फळ सुणण रै खातर खड़ी है। दफ्तर में हेम बाबू अर्जियां रौ ढिग लियां बैठा है। दरवाजै कनै चपड़ासी ऊभौ है।)
हेम – (अपणै आप) औ आंपणौ खास आदमी है। आखा लोग सिफारस करै– औ आंपणौ खास आदमी है। (तेजी से आ’र) तौ हूं खास आदमी हूं। हूं किणी री सिफारस नीं मानूंला। जे दूजां री सिफारस मानूं तौ म्हैं मर जाऊंला। म्हारी आतमा मर जावैला। दूजा म्हारै माथै छा जावैला। नहीं; हूं मरणौ नहीं, जीवणौ चावूं हूं। बिना किणी रै डर अर दबाव रै, हूं अपणी आतमा रौ फैसलौ देऊंला। आज म्हनै कीं रौ भी डर नहीं है। आज म्हारी आतमा आजाद है। नीं तौ हूं सत्ता सूं डरूंला, नीं सगा संबधियां सूं। सांचै अधिकारी नै मौकौ दूं ला। चाहै म्हारी नौकरी रैवै चाहै जावै। (घंटी बजा’र)
हेम – चपड़ासी!
चपड़ासी – (आवै) हुकम सा’ब।
हेम – जा’र बारै बैठा सरदार बोधासिंह, भीखाराम, डूंगरसिंह और रामलाल उम्मेदवारां नै बुला ला।
(सारा सिफारसी पांच उम्मेदवार आवै)
हेम – (अरजियां ले-ले नै अेक कानी न्हाखता हुआ) सिफारसी टट्टूवां री अरजी खारज! नेताजी अऱ मिनिस्टरां री सिफारस खारज! भाई भतीजां री सिफारस खारज। सांचौ ईमानदार रामलाल इंटरव्यू में पास। जाऔ भाग जाऔ।
(उम्मेदवार बारै जावता जावता बोलै)
अेक उम्मेदवार – रिस्वत खाग्यौ।
दूजौ – बेईमान है।
तीजौ – अब देखस्यां ई कुरसी माथै कित्ता दिन रैवै?
चोथौ – अरै हूं इणनै बरखास्त करा नै छोडूला।
(सगळा मिळ नै नारौ लगावै ‘रिस्वतखोर अफसर रौ नास हौ’ ‘हेम बाबू मुड़दाबाद’)
(दफ्तर रै भितर सूं हंसणै री अवाज आवै।)
(पड़दौ पड़ै)