‘दळथंभ’ चढै झालौ दुझल्ल। होय गौम वौम बे हल्लमल्ल॥

सामंत मत रावत्त सूर। केवांण पाण झल्ले करूर॥

बधवै ‘राघवोदे’ ब्रजागि। खळ खड़ तिकौ परचंड खागि॥

रसबीर रंगै पाट्ड़ीय रांण। भळहळै जेमि रत प्रात भाण॥

पख्खर सबह सज्जे प्रचंड। मारका भड़ां भिड़जा भड॥

सार का कोट येही सबोध। जगहथ्थ पथ्थ सायक्क जोध॥

भारथ्थ कथ्थ राखण भुजाळ। समरथ्थ जिसा मांझी सिंघाळ॥

कथ येह सुणी चढै कमंध। बरजागि चढै बेऊ बधबंध॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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