संदा वंदा दाहिमा जाणि, कछवाहा मेरा मुंकिआणं।

बारहड बोडाणा अतिझूझार, वाघेला मिलिया तिह अपार॥

भाटिय गवड तुंवर असंख, सुभट सेल चाल्या हसंत।

डाभिय डाडीय अति घणा हूण, डोडीयआण पयाणरूण॥

गुहिलत्र गहिल गोहिल राव, परमार पधार्या अति उछाह।

सोलंकी सिंघल धणइ मंडाणि, चंदेल खाइड़ा नइ चहुआण॥

जाडा जादव महुउड़ा एव, सूरमा रणमल जाइ तेउ।

राठवड़ मेवाड़ा निकुंद, छत्रीस कुली मीली आरम्भ॥

हम्मीर राय हरखीय अपार, दीठा मिल्या अति झूझार।

मंडलीउ मउडउधा राणो राणि, सहुवमिलि आव्या तेणि ठामि॥

रजपूतां नइ दीधा अति भला सनाह, अंगा रंगाउलि तणा ठाह।

छत्रीस डंडाऊध लीय जाम, ‘महिमासाह’ उतर्‌या ताम॥

मार्‌या मीर मलिक जाम, सगळा दळ मांहि पड्यउ भंगाण।

नवलखि मार्‌या निसरखान, बंबारव पड्यउ तेणि ठाणि॥

‘महिमासाहि’ मार्‌या घणा मीर, गढ जाय जुहार्‌या हमीर।

जस जयति हुउ चहुआण राय, कवि कहइ ‘व्यास भंडउ’ उछाह॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीरायण ,
  • सिरजक : भांडउ व्यास ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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