रति परम प्रिया ऋतुराज जानि।

नित रहत निरंतर रूप मानि॥

बहु किन्नर गावत देवनारि।

गंधर्व संग अति बल उदार॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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