किय स्राद्ध नंदि मुख बेद बृद्धि।

सब जात कर्म किन्नौ सु सुद्धि॥

गो भुम्मि अन्न कंचन सु दिन्न।

द्विजराज सकल संतुष्ट किन्न॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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