सुनि राव जैत मन हर्ष किन्न।

भंडार अमित सब खोलि दिन्न॥

गुरु बिप्र मंत्र मंत्री सु बोलि।

बड़ भीर भइय नृप आय पौलि॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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