इक आस्रम सुंदर अति अनूप
जोधराज
इक आस्रम सुंदर अति अनूप।
तिय गान करत सुंदर सरूप॥
सौरभ अपार मिलि मंद पौन।
मृगमद कपूर मिलि करत गौन॥
स्रोत
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पोथी : हम्मीर रासो
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सिरजक : जोधराज
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संपादक : श्यामसुंदर दास
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प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी
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- संस्करण : तृतीय