ग्रहै बरछी जब गोरल राय, सु नागन ज्यूं नर ऊड़त खाय।

फोड़त पाखर साथ पलांण, सु जातन का सिर सुंदर मांण॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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