अजमेरि धरा आदीत ऊगि। पयनिधी परां परकास पूगि॥

‘भीमाळ’ बस उजवाळ भूप। धर खळा तेज परजाळ धूप॥

सोयणा सोज चदह सुभाव। रजवट्ट वट्ट अजमेर राव॥

रिख ब्रंमराज रिख गौड़ राज। परमाण हद्द हिंदवाण पाज॥

‘गोपालमल्ल’ दादौ गरीठ। पूरक प्रमाड़ा पीठ पीठ॥

ता तणै पाटि ‘भीमह’ त्रसीग। रजवाट रखण कुळवाट रीग॥

अड़वड़त जोस आभै अधार। जुध लाख दळां जीतण ज-वार॥

खय लाख दळां भाजण खड़ग्गि। असपती दळां सिंणगार अग्गि॥

असपती दळा आगळि अमौड़। गैढल्लमल्ल गैढल्ल गौड़॥

हींसल्ल मल्ल बाहणों हाथ। अैनड़ा नड़ा ऊनथां नाथ॥

गजीव घरण जेहा अगज। सायक्क जोध पायक्क सज॥

‘भीम’ जिम ‘भीम’ गयंदा भ्रमाड़। कळहणे भीछ भीछा किमाड़॥

अंगद्द पांव मांडण अबीह। धूवळां तणै सिर बगा ध्रीह॥

वीर जिम वीर जुजिस्ट वाच। ऊपाड़ पहाड़ा जड़ां आच॥

बांकुड़ा भड़ां बळ काढ बढ्ढ। गढ़ रखण बिभाड़णहार गढ्ढ॥

त्रासिया भड़ां तरसीय वाक। छड़ियाळ भड़ा ऊतार छाक॥

त्यागिया राय जस तिल्ल तेह। मौजिया राय तेरहो मेह॥

स्रोत
  • पोथी : बिन्है रासौ ,
  • सिरजक : महेसदास राव ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थान राज्य प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
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