मांडवि मिलिय सुहासणी, सखी उढणि नवरंग घाट कि॥

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

हियडइ हरष अपार कि, सखी बोलइ मालदे वीर कि॥

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

हार निगोदर बहिरखा, सखी नेउर रणझणकार कि॥

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

त्राट करु करि कनकमइ, सखी मोतीयडे पूरु चुक कि।

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

तिलक करु कुंकुम तणां, सखी तिणि रंगि राउ वधावु कि।

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

असुर दली घरि आवीउ, सखी शंकर छोडीउ बंध कि।

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

कान्हडदे जीवे घणूं, सखी बेलिइ मालदे वीर कि।

जीतउं सहीय वधामणूं ए॥

स्रोत
  • पोथी : कान्हड़दे प्रबन्ध ,
  • सिरजक : पद्मनाभ ,
  • संपादक : कान्तिलाल बलदेवराम व्यास ,
  • प्रकाशक : राजस्थान प्राच्यविद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर ,
  • संस्करण : second
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