ऊडा ऊडा नीर अथग जल भरिया।
जठे तेरू रो थाग नहीं लागे ओ रावल माळ।
हो जाओ साध सुधारो थारी काया॥
समझावे थाने रूपा बाई।
पड़ोसियां री नार आंगणियै ऊभी।
जिण ने बेटी कह बतलावो ओ रावळ माल॥
तालर देख बीज मती बोवो।
हासल हाथ नहीं आव ओ रावळ माल॥
घर में गंगा घर में जमुना नाडोलिये क्यों नहावो ओ रावळ माल।
कहे बाई रूपा उगमसी री चेली।
संता रो अमरापुर में बास ओ रावळ माल॥