थे मानों म्हारा भाइड़ा रे समझने चालो म्हारा लाल।

भव दुख भागे रे थारा भव दुख भागे रे।

मिलाऊं सुंदर स्यामसूं रे हा॥टेर॥

चालो म्हारा भाइड़ा रे आपां सत रे जुमले मांय।

मिलने गास्या हे उठे मिलने गास्यां हे॥

तीनूं दुख मेटा रे चालो आपां गुरा रे दरबार।

मन ने समझास्या हे मायले ने समझास्या हे॥

भाया नुगरा मत रहीजो रे रहीजो सुगरा सपूत।

कपूत पणों त्यागो रे कपूत पणों त्यागो रे॥

नुगुरा पुरुसा रा रे भाई तज दीजो संग।

थाने कंठ लगावे हे थाने कंठ लगावे हे॥

गावो म्हारा भाइड़ा रे आपों विरह रा गीत।

हरि मिल जावे हे जिण सूं हरि मिल जावे हे॥

केवे यूं रुपादे थाने सत रा बैण।

बैण म्हारा सुणजो हे भव पैला तिरजो हे॥

स्रोत
  • पोथी : राजस्थान संत शिरोमणि राणी रूपांदे और मल्लीनाथ ,
  • सिरजक : रूपांदे ,
  • संपादक : नाहरसिंह ,
  • प्रकाशक : राणी भटियाणी ट्रस्ट,जसोल, बाड़मेर