चतुरंगी सेना चली यम संभरि वार।
सहस येक भड़ सज्जिया वोपै असवार॥
जड़िया टोप सनाह जड़ि जड़ि राग जियार।
टोपां ऊपरि बांधिया फैटा जरदार॥
बळै मौरचंद्र बांधिया सूरा सिरदार।
द्वादस तिलक बणाविया विध वेद विचार॥
सिलहां झळमळ सांमता भळहळ भालार।
सहस किरण धरि ऊगियौ किरि सूर सवार॥
दूजा दणियर दीपिया ‘मुकदेस’ मंझार।
गज मोहरै अग्राजता बाजता नगार॥
पैदल पायक घायका नायकां निहार।
बाणदार तौबच्चिया येखै अणपार॥
ताता आगळि कौतिला खिलता खूंदारं।
साज झळबे सोवनी फबिया फूंदार॥
पाणे डौरि सपाट में धरिया पर धार।
जग ठणकै बाजता ठवि तेठि मार॥
सुत्रनाळि गजनाळि रथा रथनाळि निहार।
हड़वड़ माची हैवरा घर पुड़ धूजार॥
उड़ि गिरद मंडळ अड़ि येखे अंधियार।
मंडिया आपज मौरछा करि मत करार॥