कंध सवाहै कवचटा, ऊपटां अपारा।
‘बळभद्र’ तणौ बखाणिजै, ‘तेजौ’ तिण बारा॥
खाड़ाहथ खंगार रा, बधिया बहसारां।
‘रूपा’ जेहा राठवड़, भंजण गज भारा॥
चत्रभुज का बणवीर का, भाखरा भलारां।
पंचायण नाथावता, कीता अधिकारा॥
सूर नरुका सांमता, अणचूक उदारा।
भारमला सुरताण का, जोगी जुहारा॥
पूरणमल रूपसिंघ का, भंजण गज भारां।
आसक्रण कलियाण का, घण जांण अपारां॥
राजधरा हम्मीर का, खेहावत खारा।
कुंभावत कुंभाणिया, जाणै जोधारा॥
राजावत चढिया रुड़ा, सेखावत सारा।
बळ बळ सैदाना बजै, घणघौर नगारा॥
बळ बळ बणै बंदूकची, खड़ि खुर-खंदारा।
बळ बळ पायक नच्चता, धायक धणवारा॥
बळ बळ धज्जा फरकती, पचरंग प्रकारां।
बळ बळ बाणवि राजिया, घमसाण मंझारा॥
बळ बळ ठमकै बीरघट, मैमंत मंदारा।
बळ बळ धमकै पाखरां, चमकै चौधारा॥
बळ बळ जोधा बहसिया, दे सेल सलारा।
हाहुळी माची हैवरा, गैवरा गूजारा॥
यों चढिया जैसिंघ दे, चढिया दळ लारां।
जांणि सुमेरु बिराजिया, कुळ आठ मझारां॥