लिये सु दोय बज्र लाल एक मुक्त मालयं।

कही जु एक दोय बाज स्वाँन दोय पालयं॥

सवार एक आपही सबै पयाद चल्लियं।

रहे तनक्क पौरि जाय फेरि अग्ग हल्लियं॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
जुड़्योड़ा विसै