लिये सु दोय बज्र लाल एक मुक्त मालयं।
कही जु एक दोय बाज स्वाँन दोय पालयं॥
सवार एक आपही सबै पयाद चल्लियं।
रहे तनक्क पौरि जाय फेरि अग्ग हल्लियं॥