भलोस आज मुंझ भाग, आप ग्रेह आविया।
दरस्स तो रघू दिलीप, पुन्यहूंत पाविया।
कहौ मुनिंद्र काज केण, आगिया सु कीजिये।
करी तुरी क देस कोस, लछी भोमि लीजिये।
वदै मुनेस जेण वार, देखि भूप वीनती।
मखं सहाय काज मेलि, पुत्र तो रघूपती॥