असंत संत मोहियं, बसंत खोलि जोहियं।

बजंत बीन बाँसुरी, मृदंग संग आँसुरी॥

लियं सुबाल बृंदयं, जगत्त काँम द्वंदयं।

अनेक रूप सुंदरी, मनोज राव की छरी॥

स्वबेस केस पासयं, मनो कि मैन फाँसयं।

गुही त्रिबिद्धि बैनियं, कि मोह किन्न सैनयं॥

महा सुघट्ट पट्टियं, सृँगार भूमि फट्टियं।

बिचै सुमंद रेखयं, महा विसुद्ध देखयं॥

बिसाल भाल सोमियं, छपा सु नाथ लोभियं।

सु मध्य सीस फूलयं, दिनेस तेज तूलयं॥

भरी सु मुक्त मंगयं, मनो नछत्र संगयं।

बिसाल लाल बिंदयं, मिले सु भोम चंदयं॥

जराव आड भाइयं, मनो मिलन्न आइयं।

दिनेस भोम बुद्धयं, ससि गृहे सु सुद्धयं॥

कपोल गोल आद्दसं, कि भौंह भौंर साद्दसं।

प्रफुल्ल कंज लोचनं, मृगाख्खि गर्व मोचनं॥

त्रिबिद्ध रंग गातयं, सु स्याँम स्वेत राजयं।

बनी कि कीर नासिका, सु गथ्थ नथ्थ भासिका॥

मनो सु काँम ओपयं, दयौ सुचक्र कोपयं।

करन्न फूल राजयं, उभै कि भाँन साजयं॥

सुहंत स्याँम अल्लकं, भ्रमत्त भौंर वल्लकं।

अरुन्न रेख बेसयं, पियूष कोस देखयं॥

अनार दंत कुंदयं, लसंत बज्र दंतय।

बुलंत बाणि कोकिला, बिपंच की सुरं मिला॥

स्रोत
  • पोथी : हम्मीर रासो ,
  • सिरजक : जोधराज ,
  • संपादक : श्यामसुंदर दास ,
  • प्रकाशक : नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी ,
  • संस्करण : तृतीय
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