ठगनीति अर पड़पंचां सूं
मिनखपणै नै मेटण खातर
कद राड़ मँडी अबकाळै
अेड़ौ समै कदैई नीं आयौ
कितरौ रगत रळ्यौ मिनखां रौ
कितरौ जाळ झपट रौ कातै!