मतळब खुद रौ काढण सारू
लागोड़ा सगळा असवार
जाज हाकणिया लड़भिड़ जावै
मारै कूटै है लगातार।
उण जीवण री कीं गत व्हैला
थै इज कीं बतळावौ नीं
जो घणा-घणा है निबळा कंवळा
तिरणै री गत जाणै नीं।