इज्जत राखै टांट में, सौ-सौ करले नाक।

जन सेवारी ओट ले, घर भर ले हक नाक।

घर भर ले हक नाक, काम जनता री सेवा।

उल्लु सीधो करै, मिलै फळ मिसरी मेवा।

कह निधड़क कविराय, नही है इण में छीजत।

काम, कामरा दाम अर मिल जावै इज्जत॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : शिवराज छंगाणी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राज.) ,
  • संस्करण : 13
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