सीरो बैरी सीत को, सी नै करै सुवांत।
सीधो उतरै आंत में, बिना हलाया दांत॥
बिना हलाया दांत, जोस रग-रग में भरदे।
गेर्या दाख, बिदाम, जायको दूणो कर दे॥
होवै छप्पन भोग, चायै पकवान जखीरो।
सकल पदारथ वृथा, बिन्यां झरझरतो सीरो॥