सीरो बैरी सीत को, सी नै करै सुवांत।

सीधो उतरै आंत में, बिना हलाया दांत॥

बिना हलाया दांत, जोस रग-रग में भरदे।

गेर्‌या दाख, बिदाम, जायको दूणो कर दे॥

होवै छप्पन भोग, चायै पकवान जखीरो।

सकल पदारथ वृथा, बिन्यां झरझरतो सीरो॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिहारी शरण पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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