राज-कचेड़ी पूगग्या, भोंदूमल जी आज।
दफ्तर सारो सोधियो सर्यो न कोई काज।
सर्यो न कोई काज, संभाळ्या खुदरा खूंजा।
अफसर बाबू मांग रैया, पग-पग पर पूजा।
कह निधड़क कविराय बात रो लेवो लेखो
स्वच्छ प्रसासन न्याय मिलै है किसड़ो देखो॥