लड़िया काठा लोगड़ा, लाठी-गोळी झेल।
रुळ्या गांव रा टापरा, समझ्या फांसी खेल।
समझ्या फांसी खेल, जगत में हाको फूट्यो।
हरख्यो भारत देस, भाग गोरां रो रूठ्यो।
गोळां रो अभिसेग, घाव में छूरी करिया।
जुलम्यां रा सिरदार, देसहित कद हा लड़िया।