गरम जलेबी केसरियां आंटा बेळीदार।

मैदा की नळकी बणा घालै रस की धार॥

घालै रस की धार, कंदोई करै सतूनो।

धरै जलेबी च्यार, भरै छैरस सूं दूनो॥

नर, किन्नर, बेताल, देवता, दानव देबी।

खूब चाव सूं खाय आं’री जलेबी॥

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : बिहारी शरण पारीक ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-27
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